सोमवार, 13 जनवरी 2020

WHAT IS CRR(CASH RESERVE RATIO) IN HINDI - जानिए नकदी आरक्षित अनुपात क्या है हिंदी मे

WHAT IS CRR(CASH RESERVE RATIO) IN HINDI - जानिए नकदी आरक्षित अनुपात क्या है हिंदी मे


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CRR क्या है और यह किस तरह उपयोग मे आता है(WHAT IS CRR AND WHERE IT IS USE AND HOW)



सीआरआर के बारे मे (ABOUT CRR)

सीआरआर(CRR) का का पुरा नाम कॅश रिजर्व रेशो(CASH RESERVE RATIO) है। इसका उपयोग आरबीआई(RBI) के द्वारा कमर्शिल बॅन्को के लिए किया जाता है और इससे देश की महंगाई को नियत्रित करने के लिए उपयोग किया जाता है। सीआरआर(CRR) को प्रतिशत(PERCENTAGE) के हिसाब से लिया जाता है जैसे की 4 % तक , 8% तक होता है। आरबीआई(RBI) कमर्शिल बॅन्को(COMMERCIAL BANK) मे जमा रशि का कुछ हिस्सा अपने पास रखता है उसी जमा राशि को सीआरआर(CRR) कहते है यानी की CASH RESERVE RATIO(कॅश रिजर्व रेशो, नकदी आरक्षित अनुपात) कहाँ जाता है।

सीआरआर क्यू उपयोग किया जाता है(CRR USE)

सीआरआर(CRR) का उपयोग इसलिए किया जाता है ताकी बॅन्क द्वारा ग्राहको को ज्यादा कर्ज ना दिया जा सके और बॅन्क उन कर्ज को नियंत्रित कर सके जिससे महंगाई ज्यादा ना हो सके। इसके साथ एक और अनुपात(RATIO,रेशो) होता है जो बॅन्को पर लागु किया जाता है उसे एसएलआर(SLR) कहते है यह दोनो महंगाई को नियंत्रित करने के लिए बहुत आवश्यक होते है इसलिए सभी बॅन्को पर यह लागु किया जाता है।

सीआरआर(CRR) महंगाई पर असर कैसे डालता है

महंगाई को नियंत्रित करने के लिए दो रेशो या अनुपात का उपयोग किया जाता है वह सीआरआर(CRR) और एसएलआर(SLR) के द्वारा किया जाता है। किसी बॅन्क मे जमा राशि का कुछ हिस्सा आरबीआई(RBI) अपने पास रखता है जिसे सीआरआर(CRR) कहते है और इसके अलावा बॅन्क को एक और हिस्सा आरबीआई(RBI) मे जमा करवाना पडता है जिसे एसएलआर(SLR) कहते है अब कैसे आरबीआई(RBI) महंगाई कैसे कम करता है जानते है। उदाहरण के लिए अगर देश मे महंगाई है तो आरबीआई सीआरआर(CRR) और एसएलआर(SLR) का अनुपात कम कर देता है जिससे बॅन्को के पास ज्यादा पैसा बचता है जिससे बॅन्क कर्जो पर कम ब्याज(INTEREST) लेना शुरु कर देते है जिससे जनता कोई भी वस्तु जैसे घर(PROPERTY),उत्पाद(PRODUCT) आदि जिसमे कर्ज यानी की लोन लेने की सुविधा होती है ऐसी वस्तुए ज्यादा खरीदना शुरु कर देती है जिससे देश मे वस्तुए ज्यादा खरीदी जाएंगी जिससे देश मे नकदी का बहाव ज्यादा होगा उससे महंगाई कम होगी ठिक वैसे ही अगर देश मे ज्यादा ही नकदी होने लगे तो आरबीआई(RBI) इसका उलटा करता है जैसे की सीआरआर और एसएलआर का अनुपात बढाकर बॅन्को मे कम पैसा रखवाता है जिससे बॅन्क अपना मुनाफा निकालने के लिए ब्याज दर बढा देते है जिससे जनता वस्तुए कम खरीदती है और महंगाई थोडी बढा जाती है। तो ऐसे यह दोनो मिलकर देश की महंगाई को संतुलित करते है और इसकी एक और वजह है की बॅन्क ज्यादा कर्ज किसी को न दे और ताकी यदि कर्ज तय सीमा मे वसूल न किए जाने पर बॅन्क दिवालिया न हो इसलिए यह पद्धति अपनाई जाती है।

रविवार, 12 जनवरी 2020

HOW TO START A REAL ESTATE BUSINESS -रियल स्टेट का व्यापार कैसे शुरु करे जानिए हिंदी मे(IN HINDI)



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रियल स्टेट का व्यापार कैसे शुरु करे(HOW TO START A REAL ESTATE BUSINESS)



रियल स्टेट के बारे मे (क्या है और इसका अर्थ क्या है और प्रकार,ABOUT REAL STATE)

रियल स्टेट इसे सरल भाषा मे बताए तो किसी व्यक्ति को किसी जगह या स्थान का हवाई और भूमिगत अधिकार दिलाने मे सहायता करना अगर और भी सरल भाषा मे कहे तो किसी व्यक्ति की जगह को खरीदकर उसे घर,इमारत, फ्लॅट अथवा जगह की जगह किसी को बेचना और मुनाफा कमाना है। रियल स्टेट का देश के विकास मे भी महत्वपुर्ण योगदान होता है इसलिए इस क्षेत्र मे विकास होनेपर देश की जीडीपी पर भी दिखाई देता है ऐसा इसलिए की जब भी कोई जगह बनाई जाती है या इमारत निर्माण की जाती है और बेची जाती है और उस इमारत मे रहनेवाले लोग आने तक की प्रकिया मे बहुत सी वस्तुओ का उपयोग होता है जैसे की सिमेंट,बालू,मजदुर,पैसा हार्डवेअर की वस्तुए आदि बहुत कुछ जिससे देश पर प्रभाव पडता है। रियल स्टेट के कुल चार भाग है- 1) रेसिडेंशियल - यानी की जहाँ मनुष्यो के रहने लायक जगह जहाँ सबकुछ प्राप्त है। 2) कमर्शियल - यह वह जगह जहाँ इमारते हो और वहाँ मनुष्य क रहने और काम करने की भी सुविधा होती है। 3) इंडस्ट्रियल - ऐसा स्थान जहाँ बडी-बडी कंपनिया अपनी फक्टरी बना सके जहाँ मनुष्यो का आना-जाना कम होता है। 4) लॅन्ड-यानी की बिलकुल खाली स्थान जैसे की कोई जंगली क्षेत्र जिसे खरीदा जाता है। रियल स्टेट का व्यापार आरंभ करना इतना कठिन कार्य नही है, लेकिन अगर इसमे आने की सोच रहे है तो आपके पास अच्छी बोली और स्वभाव और अपने व्यापार को आगे बढाने की नई-नई रणनीति होनी चाहिए ताकी लोगो मे आपके प्रति विश्वास बना रहे क्योंकी इस व्यापार मे विश्वास होना एक-दुसरे पर बहुत महत्वपुर्ण है खासकर ग्राह्को मे तो आगे जानते है इस व्यापार के लिए क्या-क्या करना है।

1) अपने आप को इस क्षेत्र के लिए तैयार करे।

अपने आप को तैयार करना शारीरिक और मानसिक रुप से यह किसी भी व्यापार करने के लिए बहुत अहम होता है और आपको इस क्षेत्र मे ग्राहको को विश्वास दिलाना होता है और उस खरा भी उतरना होता है तो इसके लिए आपको-अपना व्यक्तित्व बहुत अच्छा बनाना होगा। इस क्षेत्र मे बहुत से लोग अपने रिश्तेदारो से पुछना और उनपर विश्वास करना बहुत सुरक्षित महसुस करते है तो यदि कोई ग्राहक आपके पास आता है तो उसका विश्वास बनाए रखे और उन्हे ठगने का प्रयास न करे।

2) अपना अलग से दफ्तर का निर्माण करवाए

ऐसा इसलिए की इस व्यापार से जुडे लोगो होनेपर बहुत-सी गतिविधिया होती है जिसके लिए एक ऑफिस बनवाना चाहिए। अगर आपके पास इतनी राशि नही है तो आप अपने घर से भी शुरुआत कर सकते है और अपना व्यापार बढनेपर दफ्तर बनवा सकते है।

3) रियल स्टेट एजेंट का लाइसेंस बनवाए

यह पहले जरुरी नही था लेकिन रेरा के मुताबिक अब यह जरुरी है और इसका लाइसेंस आप ऑनलाईन भी प्राप्त कर सकते है इसके लाइसेंस के लिए आप रेरा की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर और जान सकते है लेकिन इस लाइसेंस को लेने के लिए आपको पढाई करनी पडेगी और उसका सर्टिफिकेट लेना जरुरी है। आप अलग-अलग पद के लिए भी लाइसेंस के लिए आवेदन कर सकते है। रियल स्टेट के लाइसेंस की समयसीमा 5 वर्ष की होती है उसके बाद इसे हर पांच साल मे रिन्यु करवाना पडता है। आप रियल्टर लाइसेंस के बारे मे भी जानिए।

4) रियल स्टेट एजेंट के लिए कोर्स

रियल स्टेट एजेंट के लिए आपको कोर्स करने पडते है ताकी आप लाइसेंस प्राप्त कर सके और इसके लिए हर विश्व विद्यालय मे इसकी शिक्षा दी जाती है हम आपको कुछ नाम भी बता देते है जैसे की एमबीए इन कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट मॅनेजमेंट, रियल स्टेट मॅनेजमेंट, कंस्ट्रक्शन मॅनेजमेंट, कंस्ट्रक्शन अंड फिनांस मॅनेजमेंट, पोस्ट ग्रजुऐट प्रोग्राम इन रियल स्टेट और भी कोर्स है आप नजदीकी महाविद्यालय या विश्व विद्यालय मे जाकर और भी जान सकते है ऐसा इसलिए की इस क्षेत्र मे आप को किस पद पर काम करना है उसके हिसाब से आप कोर्स कर सकते है और अगर आप सिर्फ रियल स्टेट एजेंट बनना चाहते है तो आप दिए गए कोर्स मे से कोई भी कर सकते है।

आप के पास यह सभी है तो या आप यह सभी पा लेते है तो आप इसका व्यापार शुरु कर सकते है और ग्राहक बना सकते है और आप अपना कारोबार बढा सकते है कानूनी तौरपर ।

रविवार, 5 जनवरी 2020

EBOLA VIRUS DISEASE के बारे मे जानिए हिंदी मे(IN HINDI)



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जानिए इबोला संक्रमण के बारे मे विस्तार से हिदी मे(EBOLA VIRUS IN HINDI)



इबोला के बारे मे(ABOUT EBOLA)

इबोला यह वायरस(VIRUS,संक्रमण) सबसे पहले 1976 मे इसके लक्षण पाए गए गए थे और इसके कारण पहले बच्चे की मृत्यु 2013 मे हुई। यह लक्षण इबोला नदी के पास ही मे बसे एक गांव से पाया गाया था और इसका नाम इबोला नदी के नाम पर रखा गया था। यह चमगादड की फ्रुट बैट नामक प्रजाति के खुन या उसके तरल पदार्थ से होता है जो की उसके शरीर के अंदर होता है और यह जिसे हो जाता है या जो इसका मरीज होता है उसे छुने या उस मरीज के संपर्क मे आने से फैलता है। इबोला वायरस का अब तक कोई इलाज या उपचार नही है जबकी इसे बारे मे शोधकर्ताओ को सालो से पता होने के बावजूद तो आप इसी बात से अंदाजा लगा सकते है की यह कितनी गंभीर समस्या है इसलिए इबोला को सबसे खतरनाक संक्रमण कहते है अथवा यदि आप इसके संपर्क मे आ गए तो आपकी मृत्यु निश्चित होगी। इबोला को ईवीडी(EVD) यानी की इबोला वाइरस डिसिज(EBOLA VIRUS DISEASE) है।

इबोला कैसे होता है और फैलता है (HOW EBOLA HAVE TO HUMAN)

यह मरिज के पसीने
मरिज के खुन से
श्वास से
शारीरीक संबंधो द्वारा
मरिज के शव के संपर्क से
सुई यानी की इंजेक्शन द्वारा
और सबसे महत्वपुर्ण यह है की आप इसके मरिज को छुए नही बहुत ही सावधानी बरते।

इबोला के लक्षण और प्रभाव (EBOLA SYMNTOMS)

इबोला के लक्षण दो प्रकार से है एक तो जब यह शरीर मे पनपता है और दुसरा यह की जब यह पुरी तरह शरीर मे फैल जाता है पहला यह की जब यह पनपता है तो क्या- क्या होता है|

टाईफाइड, बुखार, उल्टी होना
दस्त लगना
आंखे लाल होना
गले मे कफ
मांसपेशियो मे दर्द होना
बाल झडना
रक्तस्त्राव

और अब दुसरा जब यह पुरे शरीर मे फैल जाता है यह परिस्थिति बहुत भयावह होती है।

त्वचा गलने लगती है
नसो का खुन नसो से बाहर निकलकर मांसपेशियो मे चला जाता है और शरिर का अंदरुनी स्त्रावण आरंभ हो जाता है
गुरदा और जिगर का कार्य बहुत धीमा हो जाता है
शरिर गलने लगता है
शरीर जेली जैसा हो जाता है
खुन की उल्टी
खुन के दस्त लगने लगते है

इबोला का उपाय और बचने के तरीके (EBOLA TREATMENT OR SOLUTION)

इबोला का उपचार नही किया जा सकता है और न ही इसकी कोई दवा है इसके मरीजो को बहुत ही सावधानी से रखा जाता है और संभल कर रखा जाता है और सुरक्षित तरीके से उपचार करने की कोशिश की जाती है ताकी यह संक्रमण न फैले क्योंकी यह वायरस बहुत ही घातक है जिसने अब तक हज़ारो लोगो की जान ली है लेकिन इसमे अलग-अलग प्रजाति पाई जाति है जिनमे ज्यादातर शरीर खुद इसे ठिक कर लेता है या डॉक्टर्स से दवा लेने से यह ठिक हो जाता है और वह प्रजाति मनुष्यो मे न के बराबर देखी गई है तो उससे उतना खतरा नही है वह फैलती नही है इसलिए हमने आपको सिर्फ इबोला के बारे मे बताया है। इसका कोई उपचार नही होने के कारण इसके मरीज का मृत्यु के अलावा कोई और दुसरा विकल्प नही है इसके बारे मे चिकित्स्क खोज कर रहे है। इसके मरीजो से दुर रहना ही एक उपाय है बचे रहने का।

THYROID KE BAARE ME JAANE JAISE KI LAKSHAN,KARAN AUR UPCHAAR हिंदी मे(IN HINDI)



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थायराइड के कारण, लक्षण, इलाज (THYROID CAUSES,SYMPTOMS, AND TREATMENT )



थायराइड के बारे मे(ABOUT THYROID)

विश्वभर में थायराइड तेजी से अपने पांव पसार रहा है। अकेले भारत में लगभग पांच करोड़ से ज्यादा लोग थायराइड के शिकार हैं , जो बहुत घातक है । आज हम आपको थायराइड के बारे सारी जानकारी देनेवाले है जैसे की थायराइड क्या होता है, कैसे होता है, थायराइड ग्रंथि के बारे मे जैसे की कहाँ होती है और सबसे महत्वपुर्ण यह बीमारी कितने प्रकार की होती है। यह पुरी तरह से ठिक नही हो सकता और जिसे यह होता है उसे खाने-पीने पर बहुत ध्यान देना चाहिए अथवा हमेशा डॉक्टर्स से मिलते रहे और उनकी सलाह पर ही चले और उपचार कराते रहे ताकी यह खतरनाक स्तर पर नही पहुंचे। तो चलिए जानते है थायराइड के बारे मे विस्तार से :-

थायराइड क्या है?(WHAT IS THYROID)

थायराइड हमारे गले में आगे की तरफ पाए जाने वाली एक ग्रंथि होती है और यह दिखने मे तितली के आकार के जैसी होती है अथवा यह ग्रंथि शरीर की कई जरूरी कार्यो को नियंत्रित करती है जैसे की भोजन को ऊर्जा में बदलना और साथ ही यह ग्रंथि ट्राईआयोडोथायरोनिन और थायरॉक्सिन हार्मोंन का निर्माण करती है और जब यह हार्मोंस असंतुलित हो जाते हैं, तो वजन कम या ज्यादा होने लगता है, इसे ही थायराइड की समस्या कहते हैं और यह हड्डियों, कोलेस्ट्रोल मांसपेशियों व को भी नियंत्रित करती हैं और यह हार्मोंस का प्रभाव हमारी सांस, ह्रदय गति, पाचन तंत्र और शरीर के तापमान पर पड़ता है इसके अलावा पिट्यूरी ग्रंथि यह मस्तिष्क मे होती है और इसमे से थायराइड स्टिमुलेटिंग हार्मोन (टीएसएच) नामक हार्मोन निकलता है जो ट्राईआयोडोथायरोनिन और थायरॉक्सिन के प्रवाह को संतुलित रखती है जो की शरीर के लिए बहुत आवश्यक है।

थायराइड के लक्षण कैसे पाए जाते है(SYMPTOMS OF THYROID)

पसीना कम आना
थकावट होना
वजन बढना
रक्तचाप का प्रवाह उच्च होना
याददाश्त का कमजोर होना
मांसपेशियो मे दर्द होना
चेहरे पर सुजन आना
तनाव आना
प्रजनन क्षमता का असंतुलित होना
जोडो-जोडो मे सुजन अथवा दर्द का महसुस होना
महिलाओ मे मासिकधर्म का असामान्य होना
त्वचा मे रुखापन आना


इसके अलावा थायराइड किन कारणो से हो सकता है उसके बारे मे भी हम आपको बतानेवाले है और यह भी बतानेवाले है की इसके कितने प्रकार है और उनका क्या इलाज है यह भी बताएंगे।

थायराइड के कारण अर्थात यह ज्यादातर किन कारणो से होता है(WHAT CAUSES THYROID)

महिलाओ मे यह लक्षण और कारण ज्यादातर दिखाई देते है और यदि यह लक्षण आपको भी दिखाई दे तो तुरंत डॉक्टर से मिले और सलाह ले क्योंकी बाद मे इसका खतरा बाद मे बढ जाता है और अब इसके कारणो को जान लेते है।

अगर आपको पहले कभी थाइराइड हुआ हो तो भी यह आपको दोबारा हो सकता है ।
यदि 30 साल से ज्यादा उम्र होने पर भी इसके होने के आसार होते है।
आपका बढ़ता वजन या मोटापा इसका कारण हो सकता है या बन सकता है।
गर्भपात, समय से पहले पूर्व जन्म या बांझपन के कारण भी हो सकता है।
ऑटोइम्यून थायराइड रोग या थायरायड रोग आपके परिवार मे किसी को हो तो भी हो सकता है।
टाइप 2 डायबिटीज के कारण भी होता है।

थायराइड के कितने प्रकार है(TYPES OF THYROID)

थायराइड के छह प्रकार है।

थायराइड कैंसर (THYROID CANCERS)- ऐसी स्थिति जहाँ थायराइड अपनी उच्चतम स्तर पर हो यहाँ मरिज को इसके लिए सर्जरी करवानी पडती है।
हाइपोथायरॉइडज्म (HYPOTHYROIDISM)– यह तब होता है जब थायराइड ग्रंथि हर्मोंस कम मात्रा मे निर्माण करती है।
हाइपरथायरॉइडज्म (HYPOTHYROIDISM)– यह तब होता है जब थायराइड ग्रंथि हर्मोंस ज्यादा मात्रा मे निर्माण करती है।
गॉइटर (GOITER) – भोजन में आयोडीन कम होने पर ऐसा होता है, जिससे गले में सूजन अथवा गांठ जैसी नजर आती है।
थायराइडिटिस (THYRODITIES)– थायराइड ग्रंथि में सूजन आना यह थायराइडिटिस होने का संकेत होता है।
थायराइड नोड्यूल (THYROID NODULES)– थायराइड नोड्यूल तब होता है जब थायराइड ग्रंथि में गांठ बनना शुरु हो जाता है।

थायराइड कैंसर (THYROID CANCER)

थाइराइड कैंसर मे सर्जरी करवाना बहुत जरुरी है इसमे थायराइड ग्रंथि को निकाला भी जा सकता है। यह थाइराइड मे गंभीर मामलो मे से एक है तो आपको जल्द से जल्द आपको डॉक्टर से मिलकर उपचार करवाना चहिए इसके अलावा, डॉक्टर सर्जरी के बाद रेडियोआयोडीन थेरेपी का भी उपयोग करते है या कर सकते है मरीज और कैंसर हिसाब से किया जाता है।

हाइपोथायरॉइडज्म (HYPOTHYROIDISM)

जैसे की बताया गया है की इसमे हार्मोंस कम निर्माण होते है जिससे डॉक्टर्स आपको हार्मोंस की दवाई देते है जिससे हार्मोंस का संतुलन बना रहता है और यह दवाई आपको जीवनभर लेना पड सकता है।

हाइपरथायरॉइडज्म (HYPOTHYROIDISM)

हाइपरथायरॉइडज्म मे डॉक्टर्स मरीज को एंटीथायराइड दवा दे सकते हैं, यह थायराइड ग्रंथि नए हार्मोन का निर्माण करना रोक देती है अथवा डॉक्टर्स बीटा-ब्लॉकर दवा भी देते है इससे अधिक निकलनेवाले हार्मोन का शरीर पर असर नही होता और कई मरीज इसके लिए रेडियोआयोडीन थेरॅपी भी करवाते है जिससे हार्मोन निर्माण करनेवाली कोशिकाओ को नष्ट किया जाता है यदि मरिज को ज्यादा ही परेशानी होती हो जैसे की सांस लेने मे कुछ खाने मे तो सर्जरी करते है।

गॉइटर (GOITER)

जैसे की गले मे सुजन आना और गांठ जैसी नजर आना यह गॉइटर के लक्षण है यदि यह ठिक तरह से काम करती है तो यह कुछ दिनो या हफ्तो मे यह ठिक हो जाता है और नही तो इसके लिए दवा है जो की इसे सिकुड के सामान्य हो जाती है।

थायराइडिटिस (THYRODITIES)

इसमे डॉक्टर आपको दवा देते है जिसे प्रेडनिसोलोन(PREDNISOLONE) कहते है इस दवा से यह कुछ हद तक कम हो सकता है अन्यथा सर्जरी ही उपाय होता है।

थायराइड नोड्यूल (THYROID NODULES)

इसमे मरीज की नियमित रूप से जांच की जाती है और ब्लड टेस्ट अथवा थायराइड अल्ट्रासाउंड टेस्ट किया जाता हैं और दवाईया दी जाती है अगर फिर भी बदलाव नही आता है और यह गांठ का रुप ले तो इसकी सर्जरी ही करवानी पडती है।

थाइराइड यह बहूत ही गंभीर समस्या है यदी आपको बताए अनुसार इसमे से कुछ भी महसुस हो तो तुरंत डॉक्टर्स से मिलना ही बहुत उचित होगा वह आपको बेहतर विकल्प बता सकते है और उपचार भी कर सकते है और समस्या बढने के पहले ही टाला जा सकता है।



गुरुवार, 2 जनवरी 2020

चुनाव कैसे लडे और क्या है चुनावी प्रक्रिया जानिए हिंदी मे(IN HINDI)



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चुनाव के(ELECTION) बारे मे पुरी जानकारी विस्तार से



चुनाव अथवा चुनावी प्रक्रिया(ELECTION PROCESS)

सबसे पहले चुनाव अलग-अलग स्तर पर होते है जैसे की लोकसभा, विधानसभा,ग्राम सभा या स्थानीय निकायो मे मुखिया पद और वार्ड पार्षद, नगर परिषद/निगम जिसमे लोकसभा के लिए 545, विधानसभा के लिए 245 और राज्य मे विधायक और ग्राम सभा के कुल मिलाकर 4000+ से भी ज्यादा पद या स्थान होते है और आप यानी की एक आम आदमी इन सभी पदो पर चुनाव लड सकता है। नियमानुसार स्तर पर चुनाव लड्ने का तरीका अलग-अलग होता है इसलिए आपको इन सभी के बारे मे जानना होगा।

चुनाव कैसे लडे और कितने लोग एक साथ इसमे हिस्सा ले सकते है (HOW TO CONSTENT ELECTION AND HOW MANY PEOPLE IN ONE TIME CONSTENT)

लोकसभा का चुनाव लडने के लिए

लोकसभा चुनाव लडने के लिए प्रतियोगी का 25 वर्ष का होना आवश्यक है उसे भारत की नागरिकता प्राप्त हो। वह देश मे किसी भी राज्य की वोटर लिस्ट मे उसका नाम होना चाहिए, आरक्षित सीट के लिए किसी भी राज्य की मान्य जाति का प्रतियोगी होना आवश्यक है और प्रतियोगी का मानसिक संतुलन ठिक न होने यानी की पागल, विक्षिप्त या कोर्ट से चुनाव लडने पर बैन नही होना चाहिए।

विधानसभा का चुनाव लडने के लिए

इसके लिए भी प्रतियोगी की उम्र 25 साल की होनी चाहिए , भारत का नागरिक हो और जिस राज्य से चूनाव लड रहे है वहाँ की वोटर लिस्ट मे नाम होना आवश्यक है। आरक्षित सीट के लिए उस राज्य की मान्य जाति का प्रतियोगी हो। प्रतियोगी का मानसिक संतुलन ठिक न होने यानी की पागल, विक्षिप्त या कोर्ट से चुनाव लडने पर बैन नही होना चाहिए।

म्युनिसिपल कॉरपोरेशन(MUNICIPAL CORPORATION) का चुनाव लडने के लिए

इसमे चुनाव लडने के लिए उम्र सिर्फ 21 वर्ष की होनी चाहिए और किसी राज्य के नियम अनुसार जिसके तीन या उससे ज्यादा बच्चे है वह चुनाव नही लड सकते यह नियम सिर्फ कुछ राज्यो मे ही है इसके अलावा उस क्षेत्र मे प्रतियोगी की वोटर लिस्ट मे उसका नाम होना आवश्यक है।

चुनाव के लिए नामांकन(नोमिनेशन,NOMINATION) कैसे करे

चुनाव आयोग चूनाव की तारीखे तय करता है और कब और किस समय चूनाव करवाना है यह तय करता है और चुनाव मे नामांकन करने के लिए 7 दिन क समय होता है और यदी इसके बाद आप अपना नाम वापस लेना चाहते है तो उसके लिए दो दिन का समय होता है। लोकसभा और विधानसभा चुनाव के लिए यदि आप प्रस्ताव करते है या आप एक निर्दलीय उम्मीदवार है तो आपके पास 10 प्रस्तावक होना आवश्यक है। चुनाव आयोग के विवेकानुसार चुनाव 14 दिनो मे खत्म की जा सकती है और वोटिंग से 48 घंटे पहले सारे प्रचार-प्रसार बंद होना चाहिए। चुनाव लडने के लिए किसी भी कागजात की आवश्यकता नही होती है नामांकन पत्र/फॉर्म के साथ, इसके लिए सिर्फ आपका नाम वोटर लिस्ट मे होना आवश्यक है। नामांकन पत्र मे आपकी चल और अचल संपत्ति का डिक्लेरेशन/बताना आवश्यक है और प्रतियोगी दो-तीन सेटो मे अपना नामांकन भर सकते है क्योंकी अगर एक सेट गलत हो गया और दुसरा सही है तो नामांकन रद्द नही होगा।

जमानत राशि कितना देना पडता है

अगर आप लोकसभा का चुनाव लड रहे है तो आपको 25,000 हजार जमानत राशि देना है, विधानसभा चुनाव मे 10,000 की जमानत राशि देना पडता है और म्युनिसिपल कॉरेपोरेशन के लिए सिर्फ 500-1000 तक ही देना पडता है यदी आप एक आरक्षित वर्ग से है तो आपके लिए यह सभी रकम आधी हो जाती है। चुनाव मे खर्च सीमा भी चुनाव आयोग ही तय करता है जो कि लोकसभा के लिए 70 लाख है, विधानसभा के लिए 40 लाख है और म्युनिसिपल कॉरपोरेशन के लिए 10,000 से 4 लाख तक है। चुनाव मे हिस्सा कोई भी ले सकता है यह जन्मजात नही है जैसे की राजा का बेटा ही राजा बनेगा। यदी आपको किसी पार्टी का टिकट चाहिए तो आपको आपके क्षेत्र मे नाम कमाना होगा और हमेशा जनता से जुडाव मे रहना चाहिए अगर आप पार्टी का टिकटप्राप्त करने मे सफल हो जाते है है तो पार्टी आपको चुनाव के लिए फंड अथवा राशि भी देती है। चुनाव के लिए आपको कम-से-कम एक साल या छह महिने पहले से ही तैयारी कर लेनी चाहिए और आपको नामांकन पत्र मे दिए गए प्रश्नो के उत्तर देने के लिए तैयार होना चाहिए जैसे की चुनाव क्षेत्र कहाँ बनाएंगे और इसके लिए फंड कहाँ से जुटाएंगे इसके अलावा भरोसेमंद लोगो की टिम कैसे बनाएंगे और स्थानीय सम्स्याओ पर जनमत कैसे प्राप्त करेंगे इन सभी प्रश्नो के उत्तर देने के लिए आपको सक्षम होना चाहिए।

एक नेता मे क्या गुण होने चाहिए

एक अच्छे नेता को निडर,विनम्र और अपना धीरज नही खोना चाहिए और मृदुभाषा का उपयोग करना चाहिए उसे अच्छी शिक्षा और भाषन देने की कला मे निपुण होना चाहिए और यदि उसे चुनाव जीतना है तो उसे अपनी रणनीति बेहतर करनी चाहिए जनता के बीच विश्वसनीयता बनाए रखना चाहिए और उनकी उम्मीदो पर खरा उतरना चाहिए। अपना दल बनाए और वह अच्छा और विश्वसनीयता दल होना चाहिए, लोगो मे अपनी पार्टी के बारे मे विश्वास दिलाए, प्रचार-प्रसार करना चाहिए चुनाव चिन्ह और नाम अच्छा रखे। आपके नारे मिलते-जुलते और आकर्षक हो और नए-नए तरिके अपनाना चाहिए।


बुधवार, 1 जनवरी 2020

जानिए RBI के बारे की वह नोट कहाँ छापती है कब इसकी शुरुआत हुई हिंदी मे(IN HINDI)



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आरबीआई(RBI) के बारे मे विस्तार से



आरबीआई(RBI) क्या है और इसे कब बनाया गया

आरबीआई यह एक ऐसा बॅन्क है(BANK) जो की भारत के सभी बॅन्को पर नियंत्रण रखता है इसे बॅन्को का बॅन्क भी कहते क्योंकी यह भारत के सभी बॅन्को को इसके द्वारा ही बनाए नियम और शर्तो पर चलना होता है। यह भारत की मुद्राओ का उत्पादन, नियंत्रण रखने का कार्य करता है। आरबीआई को 1 अप्रेल,1935 को स्थापित किया गया था ब्रिटिश सरकार(BRITISH RAJ) द्वारा और इसके पहले गवर्नर शक्तिकांत दास थे और बाद मे भारत स्व्तंत्र होने के बाद 15 अगस्त,1949 को इसका राष्ट्रियकरण(NATIONALISED) किया गया। आरबीआई को भारत सरकार द्वारा संचालित किया जाता है। आरबीआई का पुरा नाम रिजर्व बॅन्क ओफ इंडिआ(RESERVE BANK OF INDIA) है।

आरबीआई नोट कहाँ छापती है ? (WHERE RBI PRINT NOTES)

आरबीआई अपनी मुद्राए(CURRENCY) यानी की नोट भारत मे चार जगहो पर छापती है उनमे से पहला है 1) करेंसी नोट प्रेस जो की नाशिक मे है। ,2) बॅन्क नोट प्रेस जो की देवस मे स्थित है। ,3) भारतीय रिजर्व बॅन्क नोट मुद्रण प्राईवेट लिमिटेड जिसकी पहली शाखा मैसुर , कर्नाटक और दुसरी शाखा सलबोनी,पश्चिम बंगाल मे है और आरबीआई सिक्के इंडिआ गवर्नमेंट मिंट नामक सरकारी कम्पनी मे बनाती है जिसकी भारत मे चार शाखाए है जो की मुम्बई,कोलकाता,हैदराबाद, और नोइडा मे स्थित है जहाँ सिक्को के अलावा मेडल और अवार्ड भी बनाए जाते है।

आरबीआई अपने नोट के लिए कौनसा कागज उपयोग करती है?(WHICH PAPER USE TO MAKE NOTES)

आरबीआई का कागज बनानेवाली पेपर मील होशंगाबाद,मध्य प्रदेश मे है जो की 1968 मे स्थापित की गई थी जहाँ पर नोट के कागज और स्टॅम्प पेपर आदी निर्माण किए जाते है और एक पेपर मील मैसुर मे है जिसका नाम इंडिआ प्राईवेट लिमिटेड जो की सिर्फ भारतीय मुद्राए छापती है। आरबीआई का कागज बहुत ही खास होता है यह कागज बाज़ार मे नही मिलता और ना ही इसे बाज़ार मे बेचने की अनुमति किसी को है। यह कागज कपास और अन्य वस्तुओ से बनाया जाता है और आरबीआई इसे ज्यादातर बाहरी देशो से बनवाया जाता है और यह जापान और जर्मनी इन दोनो देशो से मंगवाया जाता है कुछ सालो मे आरबीआई खुद इसकी मात्रा कम करनेवाला है और इसे ज्यादातर भारत मे ही बनाया जाएगा।

आरबीआई को कैसे पता चलता है कितना नोट छापना ? (HOW DECIDE HOW MUCH NOTES IS PRINTING)

आरबीआई को कितना नोट छापना है यह जीडीपी(GDP) से पता चलता है लगभग जीडीपी का 7-9% तक नोट हर साल छापना होता है। आरबीआई बाज़ार मे बचे हुए नोटो की गिंनती करता है और वो यह सभी बॅन्को और कुछ संस्थाओ के साथ मिलकर पता करता है और साथ ही कुल कितने नोट नष्ट किए गए उसका पता लगाकर उस के हिसाब से नोट छापती है। आरबीआई ज्यादा नोट नही छाप सकती है क्योंकी यह सारी प्रकियाए भारत सरकार के सलाह पर की जाती है।

मंगलवार, 31 दिसंबर 2019

जानिए TRP के बारे मे पुर्ण जानकारी हिंदी मे(IN HINDI)



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TRP(टीआरपी) के बारे मे पुरी जानकारी विस्तार से



टीआरपी(TRP)

टीआरपी का पुरा नाम 'टेलीवीजन रॅटींग पॉइंट(TELEVISION RATING POINT)' है। हर चैनल को अलग रॅटींग(RATING) दी जाती है जिसकी टीआरपी ज्यादा होती है टेलीवीजन(TELEVISION) बाज़ार मे उसका बोल-बाला ज्यादा होता है और वह सबसे ज्यादा कमाई भी करता है और बडी- बडी कम्पनिया उसपर ज्यादा पैसा लगाना(INVESTING) पसंद करती है ऐसा क्यु होता है हम आपको बताते है तो चलिए जानते है बहुत कुछ इसके बारे मे :-

टीआरपी कैसे पता किया जाता है ?(HOW TO CHECK TRP)

टीआरपी चेक करने के लिए कुछ चुनिंदा जगहो पर एक डिवाइस लगाया जाता है यह डिवाइस उस जगह पर मौजुद कुछ सेटटॉप बॉक्स(SETTOP BOX) से कनेक्ट किया जाता है (इसलिए सरकारे और चैनल कम्पनिया सेटटॉप बॉक्स लगाने पर इतना जोर देती है) और यदी आप कोई चैनल मे कोई धारावाहिक(EPISODE,कार्यक्रम) देख रहे हो तो सेटटॉप बॉक्स इसकी जानकारी वह इस डिवाइस तक भेज देता है और यह डिवाइस इसे कंट्रोल रुम(CONTROL OR MONETARING TEAM) तक भेज देता है जहाँ कंट्रोल रुम मे स्थित दल किस चैनल को सबसे ज्यादा देखा जा रहा है या किसकी टीआरपी ज्यादा है बताते है इसे हर एक सप्ताह(WEEKLY) मे बताया जाता है।

टीआरपी क्यो चेक की जाती है(WHY TRP CHECK)

चैनल कम्पनिया कमाई करने के लिए ज्यादातर विज्ञापन का उपयोग करते है और यह विज्ञापन(ADVERTISING) बडी-बडी कम्पनिया अपने उत्पाद के बारे मे बताने के लिए करते है। जिस टीवी की टीआरपी ज्यादा होगी यानी की जिस चैनल को देश मे सबसे ज्यादा देखा जा रहा है उसपर विज्ञापन ज्यादा दिया जाता है। यदि देश मे सबसे ज्यादा किसी एक चैनल को देखा जाता है मतलब की उस चैनल पर सबसे ज्यादा दर्शक(VIEWER) यानी की जनता और जहाँ दर्शक ज्यादा होते है वहाँ कम्पनिया विज्ञापन दिखाने के पैसे देती है और जिस चैनल के दर्शक ज्यादा होते है उस चैनल पर विज्ञापन दिखाने के भारी-भरकम पैसे लिए जाते है और चैनल उतना ज्यादा कमाता है। चैनल की टीआरपी बढाने मे धारावाहिको का मह्त्वपुर्ण हाथ होता है धारावाहिक जितना ज्यादा मनोरंजक होता है उसे दर्शको द्वारा उतना देखा जाता है इसलिए टीआरपी को चेक करना बहुत अनिवार्य होता है।

कैसे पता करे की किस चैनल की टीआरपी कितनी है (HOW TO CHECK WHICH CHANEEL TRP IS HIGHEST)

यदि आपको यह ज्ञात करना है की किस चैनल की कितनी ज्यादा टीआरपी है तो यह कार्य भारत की एक सरकारी संस्था करती है और यह अपने आंकडो को इंटरनेट पर प्रदर्शित करती है आप वहाँ जाकर वर्तमान स्थिति ज्ञात कर सकते है उनकी वेबसाइट पर जाकर उस वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करे।

शनिवार, 28 दिसंबर 2019

जानिए GDP के बारे पुर्ण जानकारी विस्तार से हिंदी मे(IN HINDI)



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जीडीपी(GDP) के बारे मे विस्तार से जाने



जीडीपी(GDP)

मित्रो आज हम आपको जीडीपी(GDP) के बारे मे बात करनेवाले है जिसके बिगड्ने से पुरे देश कि आर्थिक स्थिति उथल-पुथल हो जाती है जिसके बिगड्ने से देश की जनता और सरकारे बहुत मुसीबत मे पड जाती है और इसे सुधारने के लिए सरकारो क तेल निकल जाता है तो चलिए जानते है इसके बारे विस्तार मे :-

जीडीपी का पुरा नाम ग्रॉस डोमेस्टिक प्रॉडक्ट(GROSS DOMESTIC PRODUCT) है जिसका हिंदी मे अर्थ सकल घरेलु उत्पाद है। इस शब्द को पहली बार अमेरिका के एक व्यक्ति इसे अमेरिका से अवगत कराया जिनका नाम साइमन था और वह एक अर्थशास्त्री थे उन्होने इस शब्द का उपयोग सन 1935-44 के अंतराल मे किया और बाद मे इसे आईऐमएफ(IMF) ने उपयोग करना शुरु किया और यह बहुत तेज़ी से सभी देशो द्वारा अपनाया गया और आज हर देश इस शब्द का उपयोग करता है अपनी अर्थव्यव्स्था(ECONOMY) को बताने के लिए।

जीडीपी(GDP) किसी देश की उत्पादन क्षेत्रो मे हुई वृद्धि को निर्धारित होता है इसमे तीन मुख्य घटक यानी कृषि,उद्योग और सेवा मे उत्पादन बढने या घटने के औसत के आधार पर जीडीपी तय होती है और इसे दो तरह से मापी जाती है और दर्शाया जाता है एक है कॉन्स्टंट प्राईज(CONSTANT PRICE) और दुसरा है करंट प्राईज(CURRENT PRICE) ।

कॉन्स्टंट प्राईज(CONSTANT PRICE)

इसमे एक वर्ष तय किया जाता है जिसे आधार मानकर इसके आगे आनेवाले वर्षो मे महगाई को मापा जाता है की कितनी ज्यादा महगाई है या कम महगाई है। उदाहरण के लिए अगर किसी वर्ष की जीडीपी 10% है और इसे एक आधारवर्ष तय किया गया और अब इसके अगले वर्ष जीडीपी 9% हो गई तो इसकी जीडीपी आधारवर्ष की जीडीपी से कम है यानी अब थोडी महगाई है और इसके अगले वर्ष जीडीपी 12% हो गई तो अब यह जीडीपी आधारवर्ष(BASE YEAR) की जीडीपी से ज्यादा है यानी की देश मे कम महगाई है।

करंट प्राईज(CURRENT PRICE)

करंट प्राईज(CURRENT PRICE) यानी की वर्तमान मे देश की जीडीपी कितनी है यह ज्ञात किया जाता है जिसे उत्पादन कि वर्तमान किमत को हासिल किया जाता है जिसमे महगाई दर की दर को जोड कर वर्तमान जीडीपी मापी जाती है। भारत मे हर तीन महीनो मे वर्तमान जीडीपी मापी जाती है।

जीडीपी पर किन-किन बातो का प्रभाव पडता है

1) अगर किसी एक देश के अंदर बाहर देश की वस्तुओ या उत्पाद को बहुत ज्यादा पैमाने पर खरिदा जाता है और स्वदेशी यानी की उसी देश कि बनी चीजो को कम खरिदा जाता है तब उस देश की जीडीपी पर बुरा प्रभाव पडता है और भारत मे कुछ ऐसा ही हो रहा है ।

2) किसी देश मे उत्पादन कम होता हो तो प्रभाव पडता है उत्पादन कम होगा तो देश के लोगो को वस्तुए महंगे दाम पर मिलेंगी जिससे वस्तुए कम खरिदी जायेंगी और कम खरेदी जायेंगी तो उत्पादन कम होगा और उत्पादन कम होगा तो अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार(INTERNATIONAL MARKET) मे उत्पाद नही होंगे जिससे देश की जीडीपी पर असर पडता है।

3) देश मे विदेशी माल को बहुत ज्यादा पैमाने पर आयात किया जाता है ।

4) देश बदलाव और आधुनिकीकरण की ओर कदम नही बढाए तो भी ऐसा होता है क्योंकी अगर देश मे यह नही हुआ तो बाहरी कम्पनी इसका लाभ उठा लेते है और देश की पुंजी बाहर जाने लगती है।


गुरुवार, 26 दिसंबर 2019

जानिए BC और AD क्या है हिंदी मे(IN HINDI)



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जानिए (AD)ऐडी और (BC)बीसी वर्ष के बारे मे



AD(ऐडी) और BC(बीसी)

BC

सबसे पहले हम (BC)बीसी के बारे मे जानेगे वैसे तो इन दोनो का संबध ईसा मसीह के जन्म से है तो सबसे पहले (BC)बीसी के बारे मे (BC)बीसी वर्ष को ईसा मसीह के जन्म के पहले के वर्षो को कहते है। ईसा मसीह के जन्म ईसाई लोगो के लिए बहुत पवित्र माना जाता है यह ईसाईयो के भगवान थे और इनके जन्म के बाद ईसाईयो ने इनके जन्म के वर्ष को नया वर्ष मानना शुरु किया और इनके जन्म के पहले के वर्षो को (BC)बीसी कहा यानी की (BEFORE CHRIST)बिफोर क्रिस्ट यह इसका पुरा अर्थ है। ईसा के जन्म के पहले के 100 वर्ष को 100 (BC)बीसी, 500 वर्ष को 500 (BC)बीसी और 1000 वर्ष को 1000 (BC)बीसी कहते है।

AD

अब जानते है (AD)ऐडी के बारे मे जब ईसा का जन्म हुआ तो उस वर्ष को (AD)ऐडी कहा गया इसका अर्थ '(ANNO DOMINI)ऐन्नो डोमिनी' है यह लॅटीन भाषा से लिया गया है जिसका मतलब '(IN THE YEAR OF LORD)भगवान का वर्ष' है। ईसा के जन्म के बाद सभी वर्षो को ऐडी कहा जाता है और ईसा के जन्म के बर्ष को '(COMMON ERA)कॉमन ईरा' भी कहा जाता है और ईसा के जन्म के पहले के वर्षो को '(BEFORE COMMON ERA)बिफोर कॉमन ईरा' कहते है। ईसा के जन्म के बाद के 200 वर्षो को 200 (AD)ऐडी, 1000 वर्षो को 1000 (AD)ऐडी कहते है और यह 2019 मे पोस्ट बना है तो इस वर्ष को 2019(AD) ऐडी कहेंगे और इसे हम हिंदी मे ईस्वी सन 2019 कहेंगे।

अगर आपको (BC)बीसी और (AD)ऐडी पता करना है तो कैसे करेंगे,

(BC)बीसी + (AD)ऐडी = (TOTAL YEAR)कुल वर्ष (यह कुल वर्ष निकालने का सुत्र है)

मान लो कोई वस्तु 1000 (BC)बीसी मे खोजी गई है तो उसे अब से कितने वर्ष हो गए है, वह वस्तु 1000 (BC)बीसी मे खोजी गई है तो यह ईसा के जन्म के 1000 वर्ष पहले खोजी गई है और यह वर्ष 2019 चल रहा है,तो

1000 + 2019 = 3019 वर्ष उस वस्तु को अब से 3019 वर्ष पहले खोजा गया था।


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