गुरुवार, 12 दिसंबर 2019

ऐडसेंस के बिना कमाने के उपाय और रास्ते जानिए हिंदी मे(IN HINDI)

ऐडसेंस के बिना कमाने के उपाय और रास्ते जानिए हिंदी मे(IN HINDI)


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ऐडसेंस के बिना पैसे कमाए



मित्रो आपका स्वागत है आज हम बात करनेवाले है ऐडसेंस के बारे मे की क्या करना चाहिए अगर यह रद्द किया जाता है बहुत लोग इसके रद्द होने के बाद अपनी दिलचस्पी नही लेते और कई बार वह बिना सोचे समझे इस क्षेत्र को हमेशा के लिए छोड देते है और इसके बाद वह कोई और क्षेत्र मे हाथ आजमाते है और उन्हे वापस सबसे नीचले स्तर से शुरुआत करनी पडती है और ऐसा करने पर समय और श्रम दोनो ही खर्च होता है और ऐसा ही कुछ आपके साथ हो रहा है जैसा की आपका ऐडसेंस हमेशा के लिए रद्द किया जाता है तो निराश न हो बस उसपर आपको थोडा ज्यादा मेहनत करनी पडेगी बस थोडी ज्यादा तो चलिए जानते है क्या-क्या करना है :-

सबसे पहले ऐडसेंस रद्द हो जाता है तो सबसे पहले अपील फॉर्म भरना चाहिए और इसमे आपको सबकुछ सही-सही बताना पडेगा क्योंकी गुगल को सबकुछ पता होता है तो कोई बात नही छुपानी है और एक बार अपील फॉर्म भरने के बाद यदी वह भी रद्द किया जाता है तो 90% तक तो आपका ऐडसेंस अकाउंट तो गया समझो क्योंकी वही एक अंतिम एक रास्ता होता है की आपका अकाउंट वापस आ जाए इसके बाद आप वापस भर सकते हो दुसरी बार अपनी तस्स्ली के लिए आप लेकिन इसके बाद भी रद्द किया जाता है तो उसे छोड देना चाहिए और उसके पीछे नही लगना है तो अब आप सोच रहे होंगे की बिना ऐडसेंस के कैसे कमाए और किस-से कमाए तो ध्यान से जानिए खास करके सबसे अंतिमवाला वह आपके बहुत काम आएगा।

1) ऐडसेंस रद्द होने पर आप दुसरी वेबसाइट बना लिजिए किसी दुसरे अकाउंट से और उसपर धीरे-धीरे काम करते रहे और अपनी पहली वेबसाइट के सारे कंटेट दुसरी वेबसाइट पर कॉपी कर कर लिजिए और उसपर काम करते रहे। अगर आपकी पहली वेबसाइट पर अच्छे खासे विजिट हो रहे या आ रहे हो तो आप उसपर थोडा और काम किजिए और उसपर और ज्यादा से ज्यादा विजिट लाने की कोशिश करे और इस वेबसाइट का उपयोग आप अपनी दुसरी वेबसाइट पर विजिट लाने के लिए कर सकते हो और अपनी दुसरी वेबसाइट को और बेहतर करने के लिए करे और दुसरी वेबसाइट पर ऐडसेंस खाता चालु होने दे और बाद मे खाता चालु होने के बाद उसपर पहले जैसी गलती न करे।


2) आप अपनी वेबसाइट को ऐफिलिएट मार्केटींग के लिए उपयोग करे और इसमे ऐडसेंस से ज्यादा पैसा मिलता है बस इसमे थोडा ज्यादा ही मेहनत करनी पडती है और अगर आपको इसमे जल्दी पैसे कमाना है तो इसमे इनवेस्ट करना पडेगा। लेकिन ये वह उपाय है जो लोग आज ज्यादातर कर रहे है क्योंकी कुछ दिनो मे इसमे भारी भरकम कॉम्पिटिशन होनेवाला है तो आपको शायद ज्यादा मेहनत करना पडे।


3) यह उपाय बहुत लोगो को नही पता है शायद आज हम गिने-चुने लोग हिंदी भाषा मे यह उपाय बता रह्रे है इसके बाद शायद इसपर कुछ लोग बोले और रिसर्च करे लेकिन यह वह उपाय है जिसे ऐडसेंस रद्द होने के बाद जल्द से जल्द कर लेना चाहिए और वह उपाय यह है की आप ऐडसेंस के जैसी कोई दुसरी कम्पनी मे आपको अप्लाई या आवेदन कर देना चाहिए। अब आप सोच रहे होंगे की इसके जैसी कोई दुसरी कम्पनी भी है और वो कौन-सी है? लेकिन ऐसी बहुत सी कम्पनी ऑनलाईन है जो आपको ऐडसेंस जैसी सेवा प्रदान करती है अब आप सोच रहे होंगे की ऐसी कोई कम्पनी है तो हमे ऐडसेंस से पहले क्यु पता नही चला इसका कारण यह है की आप लोगो को इसके बारे मे कभी ज्यादा बताया ही नही गया। अधिकतर लोग जो नई वेबसाइट बनाने और पैसे कमाने के चक्कर मे आते है और कुछ प्रोफेशनल लोग उन्हे ऐडसेंस के बारे मे बताते है और उनकी कुछ लोग कॉपी करके आर्टिकल बनाते है और ऐसा ज्यादातर लोग के करने से गुगल पर ऐसे आर्टिकल सबसे ज्यादा है और भी बहुत से तथ्य है जो इसपर असर डालते है इसके बारे मे फिर कभी विस्तार मे बात करेंगे इस समय हम अपने विषय के बारे मे बात करेंगे तो लेकिन यह बात भी सच है की यह कम्पनीया गुगल ऐडसेंस से कम पैसे देती है लेकिन इतना भी कम नही देती जैसी जहाँ आपको गुगल ऐडसेंस 10 रुपए तक देगा वहाँ यह कम्पनीया 7 रुपए तक आपको देगी तो यह इतना भी कम नही है और इसमे कुछ कम्पनीया है जो कम पैसे देती है यहाँ अपनी-अपनी कम्पनीयो का अपना-अपना नियम और कायदा होता है जैसे की गुगल ऐडसेंस का है| हम आपको ऐसी सबसे अच्छी कम्पनीयो लिस्ट या तालिका नीचे अगली पोस्ट मे देंगे क्योंकी इनमे से कुछ पर हमने कार्य किया है तो हम आपको अपना अनुभव भी बताएंगे।

सोमवार, 9 दिसंबर 2019

जानिए ADSENSE DISAPPROVED HONE PAR KYA KARE हिंदी मे(IN HINDI)



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ऐडसेंस क्यू रद्द हुआ ? अब क्या करे ?



मित्रो आज हम बात करनेवाले है अ‍ॅड सेन्स के बारे मे आज हम आपको जो बतानेवाले है यह खास उन लोगो के लिए है जिनके पास वेबसाईट है और उनका अ‍ॅड सेन्स रद्द किया जा चुका है तो ऐसे मे क्या करना चाहिए तो चलिए जानते है इसके बारे मे:-

सबसे पहले यह कि अगर आपका ऐडसेंस रद्द किया है तो वह किसी वजह से किया जाता है और यह पहली बार मे ही रद्द किया नही जाता तो सबसे पहले तो जब यह पहली बार रद्द किया जाता है तो यह कुछ दिनो या महिनो के लिए रद्द किया जाता है रद्द करने के बाद इससे जुडी कम्मुनिटी आपको संदेश या नोटिस भेज देती है और उसमे आपको बताया जाता है की क्यू रद्द किया गया है अब जब ऐडसेंस दुसरी बार रद्द किया जाता है तो अधिकतर हमेशा के लिए बंद किया जाता है और यह दोबारा चालु नही किया जा सकता चाहे आप जितना अपील फॉर्म भर लिजिए ऐसे मामलो मे गुगल बहुत सख्त है इसके कारण यह दोबारा चालु नही करा सकते तो अब जानते है ऐसा क्यु होता है -

1) जब आपकी वेबसाईट अ‍ॅड सेन्स के पैमानो पर खरी नही उतरती है।
2) अगर आप अपनी वेबसाईट पर मौजुद ऐड्स को किसी दुसरे के मोबाईल से बार-बार क्लिक कर रहे हो या कोई और ऐसा कर रहा हो|
3) अगर आपकी वेबसाईट पर विसिट हद से ज्यादा कम हो गई हो तो ऐसा किया जाता है अथवा बार-बार एक ही जगह से आपकी वेबसाईट को बार-बार देखा जा रहा हो तो|
4) यह गलती लोग सबसे ज्यादा करते है और वो यह है की यदी आपको इसके बारे मे ज्यादा नही पता होता है और कुछ लोग इसे प्राप्त करने मे ज्यादा ही जल्दबाज़ी कर लेते है इसका परिणाम उन्हे बाद मे भुगतना पडता है|
5) यदि ऐड्स सेन्स आपके वेबसाईट पर चालु है और आप उस वेबसाईट का ध्यान नही रख पाते है तो भी ऐसा हो सकता है।

इन कारणो से आप कि वेबसाईट से ऐडसेंस हमेशा के लिए चला जाता है ऐसे बहुत से लोग उस वेबसाईट को छोडकर दुसरी वेबसाईट के पिछे लग जाते। अगर आपके साथ भी ऐसा हुआ है तो यह हम आपको बतानेवाले है की इससे कैसे निपटा जाए लेकिन एक बात ध्यान रखिए की रद्द हुए ऐड्ससेंस का कुछ नही हो सकता उसे छोड दे यदि अभी-भी आपके वेबसाईट पर लोग आ रहे है ज्यादा पैमाने पर तो आपको उस वेबसाईट को न छोडे हम आपको अगले पोस्ट मे बतायेंगे क्या करना है।

बुधवार, 4 दिसंबर 2019

क्या होता है HDD और SSD जानिए हिंदी मे(IN HINDI)



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क्या है HDD और SDD लैपटॉप मे ?

HDD :- सबसे पहले एचडीडी( HDD) के बारे मे जानते है इसका फुल फोर्म हार्ड डिस्क ड्राइव(HARD DISK DRIVE) है जो की मेमोरी का रुप है। यह आपको हर लैपटॉप और कम्प्यूटर मे मिल जायेंगे इसे डेटा को जमा करने के लिये उपयोग किया जाता है जैसे की संगीत,फिल्म और अन्य चीजे। इसे लैपटॉप या कम्प्यूटर मे इसकी मेमोरी को खंडो मे विभाजित किया जा सकता है अलग-अलग नाम से। यह लैपटॉप मे अधिकतर LOCAL DISK(C),LOCAL DISK(D),इस प्रकार दिखाई देती है। इसमे सीडी(CD) की तरह एक डिस्क होती है जो की टुट भी सकती है और खराब भी हो सकती है। यह औसतन टिकाऊ होती होती है। इसमे डेटा रखने के लिए ज्यादा जगह होती है और यह सस्ते होते है किसी और ड्राईव के अंतर मे।

SDD :- इसका फुल फोर्म सोलिड स्टेट ड्राईव(SOLID STATE DRIVE) है यह भी मेमोरी का एक रुप है। इसकी कार्यप्रणाली हार्ड डिस्क ड्राइव(HARD DISK DRIVE) से बहुत अच्छि होती है इसे भी लैपटॉप मे लगाया जा सकता है लेकिन ज्यादातर लोग इसे हार्ड डिस्क ड्राइव(HARD DISK DRIVE) की कार्य क्षमता बढाने के लिए किया जाता है क्योंकी इसका प्रदर्शन बहुत ही अच्छा होता है। यह ज्यादा टिकाऊ होती है और इसमे सीडी(CD) जैसी कोई वस्तु नही होती है। इसमे डेटा रखने के लिए कम जगह होती है लेकिन ज्यादा जगहवाले भी है लेकिन यह महंगे होते है।

मेरे लैपटॉप का वाई-फाई काम क्यू नही कर रहा है जानिए हिंदी मे(IN HINDI)



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क्या आपके भी लैपटॉप मे वाई-फाई(WI-FI) काम नही कर रहा ?

क्या आप के लैपटॉप मे भी वाई-फाई काम नही करता है?, पहले काम करता था लेकिन जब से विंडोव्स इंस्टाल किया है तब से काम नही करता है? या फिर नीचे दिए गए कुछ निशान मे से कुछ दिखता है तो क्या करना चाहिए कैसे ठीक करना चाहिए।

1) अगर पहले नम्बर के फोटो जैसा कुछ आपके लैपटॉप मे भी हो रहा है तो आपको लैपटॉप के कीबोर्ड से आपको Fn+F2 या Fn+F5 दबाना है यह बटन कुछ लैपटॉप मे अलग-अलग जगह पर होते है इस्लिए दो बटन बताए गए है उसके बाद आपका वाई-फाई काम करने लगेगा वैसे इस चिन्ह का मतलब यह होता है की आपने वाई-फाई बंद करके रखा है।

2) अगर आपका दो नम्बर के फोटो जैसा कुछ हुआ है तो आपको यह विडिओ देखना चाहिए।

विडिओ देखने के लिये यहाँ क्लिक


अगर विडिओ मे दिखाए अनुसार आपके आपकी सम्स्या कुछ अलग है जैसे की वाई-फाई का ओपशन दिखाई नही देता है तो यह सम्स्या आपके लैपटॉप मे ड्राईवर नही होने से हो रही है इस परिस्थिति मे आपको ड्राईवर डाउनलोड करना होगा यह करना बहुत आसान है। सबसे पहले आपको आपके लैपटॉप की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाना है जैसे की आपका लैपटॉप डेल,एचपि,लेनोवो आदि कम्पनी का तो आपको ऑनलाइन वेबसाइट मिल जाएगी। आपको आपका मॉडल नम्बर डालना है और आपको वहाँ से नेटवर्क ड्राईवर डाउनलोड करना है और सभी इंस्टाल करना है उसके बाद लैपटॉप आपको रेस्टार्ट करने का ओपशन दे तो यस कर देना है।




अगर ऊपर दिए गए उपायो मे से आपकी सम्स्या नही सुलझती है तो हमे कमेंट बॉक्स मे कमेंट करे।

CEMENT किसने खोजा और कब जानिए हिंदी मे(IN HINDI)



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सिमेंट कब बनाया गया जानिए सिमेंट का इतिहास

सिमेंट(CEMENT) का योगदान हमारे जीवन मे बहुत ही महत्वपुर्ण है हम आज जिस भी ईमारत का निर्माण करते है उसमे सिमेंट ना हो तो वह ईमारत बन ही नही सकती। आज हम आपको सिमेंट के इतिहास के बारे मे बतानेवाले है तो चलिए जानते है :-

सिमेंट का उपयोग प्राचीनकाल से होता रहा है मिस्त्र के लोग जिप्सम का उपयोग सिमेंट के रुप मे करते थे रोमन लोगो ने चुने पत्थर का उपयोग सिमेंट बनाने के लिए किया और वह उसमे रेत मिलाकर बडे-बडे पत्थरो के साथ दीवार बनाते थे। रोमन लोगो ने सोचा की एक ऐसा सिमेंट बनाया जाए जो की पानी को रोक सके इसके लिए उन्होने ज्वालामुखी की राख को मिलाकर बंदरगाह बनाया जिसका नाम पोज्जोलानिक रखा गया यह नाम पोज्जुओली गांव के नाम पर रखा गया। इन जगहो पर ज्वालामुखी की राख काफी मात्रा मे पाया जाता था इस तरह रोमन लोगो ने सिमेंटिय पदार्थो के गुण को व्यवस्थित करनेवाले पहले लोग थे। इसके बाद 1 शताब्दी ईसा पुर्व मे एक रोमन वास्तुकार और इंजिनीयर मार्कस विट्रुवियस पोलिओ(MARKUS VITRUVIUS POLIO) ने अपनी किताब 'टेन बुक्स ऑफ आर्किटेक्चर' मे बहुत-सी बातो का खुलासा किया और इसे और उन्नत बनाया। उसके बाद यूरोप मे निर्माण कौशल मे उन्नति हुई विशेषत: सिमेंट के सम्बंध मे उन्होने सिमेंट के नए रुप को खोजा जिसे पोज्जोलाना कहा गया इसे उन्होने चूने के कार्बोनाइजेशन से मोर्टार धीरे-धीरे कठोर होते है और इसे मध्ययुग के अंत मे फिर से खोजा गया लेकिन रोमन लोगो ने जैसे सिमेंट का उपयोग किया था और उनकी सामग्री के गुणो को कुशल बनाने की तकनीक उनके पास नही थी।

16-18 वी शताब्दी और उसके बाद मनुष्यो ने ज्ञान के क्षेत्र मे बहुत उन्नति की और काफी वस्तुओ को निर्माण किया और खोजा गया और इसी समय मे सिमेंट को एक नया स्तर मिलनेवाला था। सन 1759 मे स्मेटन ने लोहे के बनाने की प्रक्रिया मे चूना,मिट्टी और कुचले स्लेग से एक मोर्टार का निर्माण किया जो पानी के नीचे कठोर हो जाता था। सिमेंट का उपयोग समुद्र मे लाईटहाऊस(LIGHTHOUSE,प्रकाशिय ईमारत) बनाने के लिए किया ताकि समुद्री जहाजो की दुर्घटनाए कम हो यहाँ से सिमेंट ने प्रौद्योगिकी को नई दिशा दी। सन 1824 मे जोसेफ एस्पिन ने पोर्टलैंड सिमेंट का पेटेंट अपने नाम करा लिया इसे मुख्यरुप से मिट्टी और चूने का उपयोग किया गया इसके पश्चात कुछ वर्षो बाद 1845 मे आइजैक जॉनसन ने इसे आधुनिक पोर्टलैंड सिमेंट का निर्माण किया जिसे आमतौर पर पोर्टलैंड सिमेंट को 1400-1500 सेल्सियस पर क्लिंकरिंग(CLINKERING) करके खनिजो का निर्माण किया जो बहुत प्रतिक्रियाशील हो जाता है और इसे एक उद्योग बनाया गया। इसके बाद 20 वी शताब्दी मे बहुत-सी प्रक्रिया करके सिमेंट बनाया गया इसमे जिप्सम का उपयोग करके भी सिमेंट बनाया गया।


पिंग(PING,LATENCY) क्या होता है जानिए हिंदी मे (IN HINDI)



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पिंग क्या होता है और इसके बारे मे



पिंग(PING) के बारे मे जानना बहुत जरुरी है विशेष रुप से यदि आप ज्यादा ऑनलाईन रहते है ।
पिंग यह दो डिवाइस के बीच की सम्पर्क करने की क्षमता मे कितना समय लगा यह बताता है इसे लेटेंसी(LATENCY) भी कहते है। उदाहरण के तौर पर यदि आप किसी व्यक्ति से बात कर रहे हो और वह आपसे कुछ दुरी पर है और आप ने कुछ कहा और वह आवाज उस तक पहुंचने मे 10 सेकंड का समय लगा और उसने कुछ कहा और वह आवाज आप तक पहुंचने मे 10 सेकंड का समय लगा आप दोनो के बीच हुई बात को एक-दुसरे तक पहुंचने मे कुल 20 सेकंड लगा यह जो  समय लगा इसे ही पिंग कहते है ठिक इस प्रकार तकनीकी साधनो मे भी इस प्रकार होता है अथवा मोबाइल और कम्प्युटर मे इसी प्रकार होता है।



 पिंग को मिली-सेकंड(MS,ms) मे मापा जाता है और पिंग को हमेशा कम स्तर पर ही होना चाहिए नही तो यह काफी बडी परेशानी बन सकता है विशेष रुप से उनके लिए जो ऑनलाईन गेम खेलते है जैसे की यदि आप कोई गेम खेल रहे हो और आपने अभी कोई प्रतिक्रिया की और उस समय पिंग ज्यादा यानी लगभग 1000 मिलीसेकंड अर्थात 1 सेकंड चल रहा है तो आपकी प्रत्येक की गई क्रिया 1 सेकंड के बाद गेम उपस्थित किरदार मे क्रिया होगी और यदि पिंग 10-100 मिली-सेकंड के बीच हो तो आपकी की गई क्रिया तुरंत उस किरदार मे होगी और आप बेहतर गेम का लाभ उठा सकते है और वही पिंग ज्यादा हो तो आप परेशान हो सकते है आपका गेम खेलने का मन ही नही करेगा । पिंग 1-100 मिलीसेकंड के बीच हो तो अच्छा होता है और सबसे जरुरी बात मोबाइल और कम्प्युटर एक-दुसरे के बीच प्रतिक्रिया करने के समय को लेटेंसी कहा जाता है और इसे मापने की क्रिया को पिंग कहते है।




गुरुवार, 28 नवंबर 2019

WHEN FOUNDED PETROLIUM AND HOW,WHERE जानिए हिंदी मे (IN HINDI)



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पेट्रोलियम कब पाया गया पेट्रोलियम का पूरा इतिहास



मित्रो आज हम बहुत ही खास विषय के बारे मे जानकारी सांझा करनेवाले है आज हम बात करनेवाले है पेट्रोलियम(PETROLIUM) के बारे मे इसका दुसरा नाम गैसोलिन(GASOLINE) है इसे कुछ देशो मे गैसोलिन कहा जाता है वैसे आज पेट्रोलियम पर बहुत-सी प्रक्रिया करके बहुत से तेल और गैसे प्राप्त किए गए है लेकिन आज हम बताएगे की पेट्रोलियम का इतिहास कैसा था और कैसे यह प्राप्त हुआ। पेट्रोलियम का मानवता को आगे बढाने मे बहुत बडा योगदान है हमारे दैनिक जीवन मे इसका बहुत उपयोग होता है और यह उपयोग बहुत ज्यादा होने की वजह से आज यह हमारे लिये धीरे-धीरे जहर बनता जा रहा है। पेट्रोलियम अब विश्व मे कुछ ही समय के लिए बचा है लगभग यह सिर्फ 50-53 सालो के लिए है इसके बाद यह खत्म हो जाएगा क्योंकि यह एक प्राकृतिक संसाधन होने के कारण हम इसे बना नही सकते इसलिए विश्वभर मे ईधन के रुप बहुत-सी खोजे हो रही है। तो चलिए हम अपने विषय के बारे जानते है :-


तो सबसे पहली बात यह एक प्राकृतिक संसाधन है तो इस वस्तु की खोज नही हो सकती। यह प्रकृति मे बहुत सालो से मौजूद लेकिन इसे पेट्रोल के रुप प्राप्त करने के लिए बहुत साल लगे। यह एशिया और अमेरिका महाद्वीप पर पानी के कुए जैसे यह तेल प्राकृतिक गढ्ढो मे पाया जाता था और लोगो को ज्यादा ज्ञान न होने के कारण लोगो के लिए यह सिर्फ काला पानी था ईराक मे इसके बहुत बडे-बडे गढ्ढे थे यहाँ के लोगो ने इससे डामर बनाना सिख लिया और इस डामर का उपयोग टॉवर ओफ बॅबीलोन का निर्माण करने के लिए किया गया क्योंकी यह ज्वलनशील होने के कारण यह प्रकाश निर्माण के काम भी आती थी। प्राचीनकाल मे चीनीयो ने इसका उपयोग 2000 से भी अधिक पुर्व ईधन के रुप मे किया यह उन्होने अपने देश चीन मे किया और इसे गढ्ढो मे से यहाँ से वहाँ ले जाने के लिए बांस का उपयोग किया इसके पश्चात यह ईराक मे इस कच्चे तेल को अरबी रसायनजानकारो द्वारा विस्तारित किया जाता था और इसपर एक किताब भी लिखी गई थी जिसका नाम मुहम्म्द इब्न जकारिया राजी थी तब वह इसका उपयोग सडके बनाने के काम मे करते थे। इसके बावजूद भी ईराक और दुसरे देशो मे इसका सही उपयोग नही जान सके थे दुसरो के मुकाबले मे और इसी का लाभ कुछ लोगो ने इन देशो मे स्थित इन गढ्ढो का शोषण किया और इसका वर्णन कई भूगोलको ने किया इसके बाद भी इसे जहाजो मे भर-भर कर ले जाया जाता रहा। इसके बाद इसकी मौजूदगी पुरे विश्व मे पाने जाने लगी और युरोप मे यह पहली बार पेचेलब्रोन नामक जगह पर पाया गया लेकिन इसके साथ पानी के भी अंश प्राप्त हुए बाद मे इसे कुछ जगहो पर चिकित्सा प्रयोजनो के लिए इसका उपयोग किया गया। लेकिन इसकी खबर पुरे विश्व मे सिर्फ कुछ ही देशो को थी फिर खनन का एक रुप बन गया और इसपर धीरे-धीरे शोध आरम्भ किए गए। 1851 पहली मे तेल रिफाईनरी का निर्माण किया गया और यह एक व्ययसाय बनता जा रहा था। लेकिन इग्नेसिस इयुकसैविक्ज(IGNESIS IEWUKASIEWICZ) इस पर गहन शोध किया और एक रिफाईनरी का निर्माण करवाया जिसमे उन्होने अलग-अलग प्रकार के तेल प्राप्त किए जैसे की केरोसिन आदि। इसके बाद कोलोनेल इडविन ड्रेक(COLONEL EDWIN DRAKE) ने सबसे आधुनिक रिफाईनरी का निर्माण किया बाकी सभी रिफाईनरी तेल के गढ्ढो पर बनाई गई थी लेकिन कोलोनेल द्वारा बनाई इस रिफाईनरी को जमीन के नीचे से खोदकर तेल प्राप्त करना शुरू कर दिया इससे विश्वभर मे तेल उद्योग मे क्रांति आई इसके बाद भी ईराक जैसे देशो मे शोषण का काम जारी रहा और कुछ सालो बाद वहा के लोगो को इसके बारे ज्ञात हुआ और वहाँ के लोगो ने उसपर अपना कब्ज़ा कर लिया। इसके बाद इंजन का आविष्कार होने के बाद से इसपर प्रक्रिया और गहन शोध द्वारा पेट्रोल और अन्य गैसो के बारे मे लोगो ने खुलकर जाना और इसका उपयोग किया।

कांच को कब बनाया और निर्माण किया गया जनिए हिंदी मे(IN HINDI)



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इतिहास कांच का -


कांच,शीशा अथवा ग्लास(GLASS) का इतिहास बहुत पुराना है इसका उल्लेख भारतीय शास्त्रो मे भी मिलता है। कांच को इतिहास मे लगभग हर जगह पाया गया इसे भारत मे भी पाया गया और युरोपीय महाद्वीपो पर भी पाया जाता था इनमे अंतर इतना था की सभी ने इसे अपने-अपने हिसाब से उपयोग किया और उसपर प्रयोग किया गया था। आज हम आपको कांच का संपुर्ण इतिहास बतानेवाले है कि कैसे वह प्रकृति मे स्थित था और कैसे उसने चेहरा देखनेवाला दर्पण बना।

                                                                                           स्फटिक

हम सबसे पहले भारत की बात करते है यहाँ यह बहुत पहले ही पाया गया था इसका उपयोग महाभारत एंव रामायण काल मे भी किया गया था और कुछ शास्त्रो मे भी इसके बारे मे उल्लेख किया गया। दर्पण के रुप मे कांच का उपयोग अभी-अभी कुछ 300-350 सालो पहले हुआ उससे पहले यह सजावट के लिए एंव अन्य कार्यो के लिए उपयोग किया जाता था। भारत मे सफ्टिक अथवा क्वार्टज नामक खनिज को कांच के रुप मे उपयोग किया जाता था लेकिन यह कांच पुर्ण रुप से आज के कांच की तरह शुद्ध नही था और यहाँ से कुछ देशो को यह निर्यात भी किया जाता था। भारत मे पहले चेहरा देखने के लिए धातु से बने दर्पण का उपयोग किया जाता था जैसे चांदी,तांबा आदि।
 अब बात करते है दुसरे जगहो की लोगो के अनुसार अथवा किवंदती(लोगो की पीढी दर पीढी बताई गई बाते) के अनुसार सर्वप्रथम कांच को मेसोपोटामिया मे ईसा के जन्म के 12000 साल पहले खोजा गया वहाँ यह इस प्रकार पाया की कुछ व्यापारी समुद्रतट पर जब खाना बनाने लिए जब जहाजो से बर्तन उतारे गए और वह अपने साथ कुछ ज्वलनशील वस्तु लाए थे और जब उन्होने खाना बनाना प्रारंभ किया उससे कुछ देर बात रेतीली जगह जहाँ खाना बनाया जा रहा था वहाँ कुछ द्रव्य पदार्थ पिघलकर थोडी देर बाद वह ठोस मे बदल गया और ऐसा ही कुछ सीरिया के फिनिशीया के समुद्रतट पर भी हुआ इसके बाद यह कुछ सालो तक लोगो के गहने और ताबिज बनाने के लिए उपयोग किया जाता था फिर धीरे-धीरे कुछ लोगो ने इसपर प्रयोग किया इसमे मिस्त्रवासियो ने कांच के खुले सांचो को दबाकर तश्तरिया और कटोरे बनाना प्रारम्भ कर दिया।

                                                                                             क्राऊन कांच


                                                                                          फ्लोट कांच


                                                                                                लेंस

 ईसायुग के 350 वर्ष पहले फिनिशीयावासियो ने कांच फुंकनी द्वारा फुककर कांच के खोखले पात्र बनाए और यह मानव का एक महान आविष्कार था और यह प्रक्रिया आज भी जीवित है बाद मे यह ईसायुग के आते-आते यह उद्योग मे बदल गया और ईसायुग के प्रारंभ मे यह चरमसीमा पर पहुंच गया और बहुत बडे-बडे प्रयोग हुए और सन 1226 मे "ब्रोड शीट(BROAD SHEET)" का यानि कांच की सतह बनाई गई। सन 1330 को फ्रांस के रौएन मे क्राउन कांच का निर्माण हुआ और इसे आयात-निर्यात किया जाता था।सन 1620 मे "ब्लोअन प्लेट(BLOWN PLATE)" का निर्माण हुआ यह थोडा थाली की तरह दिखाई देता है फिर इसके बाद सन 1678 मे"क्राउन कांच(CROWN GLASS)" की गुणवत्ता मे बदलाव करके उत्तल लेंस और अवतल लेंस बनाने मे किया जाता था जिसके बाद चश्मे का आविष्कार भी हुआ बाद मे 1688 मे "पोलिश्ड प्लेट(POLISHED PLATE)" का शोध हुआऔर इसके ऊपर शोध होता रहा तथा कांच की गुणवत्ता को बढाने का प्रयोग जारी रहा और 1959 को "फ्लोट कांच(FLOTE GLASS") को बाज़ार मे उतारा गया इसके पहले भी कांच के क्षेत्र मे बहुत आविष्कार हुए और यह आज बहुत बडा उद्योग बन गया है।

शुक्रवार, 26 जुलाई 2019

WHAT IS BIO BASED PLASTICS AND BIODEGRADABLE PLASTIC (IN HINDI)



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बायोबेस्ड प्लास्टिक:-

बायोबेस्ड प्लास्टिक यह ऐसी वस्तुओ से बनाया जो की वापस बनाए जा सके(RENEWABLE,नवीकरणीय) ऐसे स्त्रोत से बनाया जाता है। इन नवीकरणीय स्त्रोत मे मक्का,आलु,सोय,चावल और गेहु आदि शामिल है। इन सभी स्त्रोत से प्लास्टिक बहुलक(PLASTIC POLYMER) तैयार किया जाता है रासायनिक और जैविक प्रकार से। बायोबेस्ड प्लास्टिक के उदाहरण जैसे की:-

पोलिलॅकटिक अम्ल(POLYLACTIC ACID)‌‌- जो की स्टार्च द्वारा प्राप्त की जाती है।
पोलिहाईड्रोक्सीबुटीरेट(POLYHYDROXYBUTYRATE) - यह रोगाणुओ के जुडे संयोग(MICROBIAL SYNTHESIS) के द्वारा बनाया जाता है।
बायोबेस्ड पोलिएथेलेन(POLYETHELENE) - इसे गन्ने से प्राप्त किया जाता है।


बायोबेस्ड प्लास्टिक के फायदे:-

यह अनवीकरणीय पेट्रोलियम पर आधारित वस्तुओ पर के विश्वास को कम करता है।

इससे छोटे पेडो को हरा रखने का घर के उपयोग मे लाई जानेवाली गैस को लगभग 35% तक कम करने मे मदद मिलती है।

यह खेती के गौण-उपज़ को बढाने मे सहायक है और यह ग्रामीण ईलाको मे तथा किसानो को सहायता प्राप्त कराता है।

बायोडीग्रेडेबल प्लास्टिक:-

प्रकृति मे शामिल सुक्ष्मजीवो के घटित अनावरण द्वारा प्लास्टिक को नष्ट किया जाता है प्रकृति द्वारा नष्ट किये गए इस प्रकार के प्लास्टिक को बायोडीग्रेडेबल प्लास्टिक कहते है या नष्ट होनेवाले प्लास्टिक। सभी कार्बनिक पदार्थ अंत मे नष्ट हो जाते है। इसमे परंपरागत तौर पर पेट्रोलियम बेस्ड प्लास्टिक भी शामिल है। लेकिन कार्बनिक पदार्थो बायोडीग्रेशन(नष्ट होना) का अनुपात भिन्न-भिन्न होता है उनके बढते पैमाने पर। यह प्लास्टिक जिसे हम बायोडीग्रेडेबल प्लास्टिक के नाम से जानते है उसे प्रकृति मे नष्ट करने के लिये तैयार किया जाता है ताकि यह विशिष्ट पर्यावरण मे नष्ट हो सके। जैसे की:- समुद्रिय पर्यावरण मे,धूप,मिट्टी मे अथवा खाद बनाने की सुविधा मे।

बायोडीग्रेडेबल प्लास्टिक के फायदे:-

यह पॅकिंग और एक ही वस्तु के उपयोग के लिये उप्युक्त है।
यह उद्यान कृषि के उत्पाद को बढावा देता है।
समुद्रिय पर्यावरण मे यह प्लास्टिक को फैलने से रोकता है।
यह कार्बनिक उपकरण को भराव क्षेत्र मे जाने से रोकता है।

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