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बुधवार, 4 दिसंबर 2019
CEMENT किसने खोजा और कब जानिए हिंदी मे(IN HINDI)
सिमेंट(CEMENT) का योगदान हमारे जीवन मे बहुत ही महत्वपुर्ण है हम आज जिस भी ईमारत का निर्माण करते है उसमे सिमेंट ना हो तो वह ईमारत बन ही नही सकती। आज हम आपको सिमेंट के इतिहास के बारे मे बतानेवाले है तो चलिए जानते है :-
पिंग(PING,LATENCY) क्या होता है जानिए हिंदी मे (IN HINDI)
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पिंग क्या होता है और इसके बारे मे
पिंग यह दो डिवाइस के बीच की सम्पर्क करने की क्षमता मे कितना समय लगा यह बताता है इसे लेटेंसी(LATENCY) भी कहते है। उदाहरण के तौर पर यदि आप किसी व्यक्ति से बात कर रहे हो और वह आपसे कुछ दुरी पर है और आप ने कुछ कहा और वह आवाज उस तक पहुंचने मे 10 सेकंड का समय लगा और उसने कुछ कहा और वह आवाज आप तक पहुंचने मे 10 सेकंड का समय लगा आप दोनो के बीच हुई बात को एक-दुसरे तक पहुंचने मे कुल 20 सेकंड लगा यह जो समय लगा इसे ही पिंग कहते है ठिक इस प्रकार तकनीकी साधनो मे भी इस प्रकार होता है अथवा मोबाइल और कम्प्युटर मे इसी प्रकार होता है।
पिंग को मिली-सेकंड(MS,ms) मे मापा जाता है और पिंग को हमेशा कम स्तर पर ही होना चाहिए नही तो यह काफी बडी परेशानी बन सकता है विशेष रुप से उनके लिए जो ऑनलाईन गेम खेलते है जैसे की यदि आप कोई गेम खेल रहे हो और आपने अभी कोई प्रतिक्रिया की और उस समय पिंग ज्यादा यानी लगभग 1000 मिलीसेकंड अर्थात 1 सेकंड चल रहा है तो आपकी प्रत्येक की गई क्रिया 1 सेकंड के बाद गेम उपस्थित किरदार मे क्रिया होगी और यदि पिंग 10-100 मिली-सेकंड के बीच हो तो आपकी की गई क्रिया तुरंत उस किरदार मे होगी और आप बेहतर गेम का लाभ उठा सकते है और वही पिंग ज्यादा हो तो आप परेशान हो सकते है आपका गेम खेलने का मन ही नही करेगा । पिंग 1-100 मिलीसेकंड के बीच हो तो अच्छा होता है और सबसे जरुरी बात मोबाइल और कम्प्युटर एक-दुसरे के बीच प्रतिक्रिया करने के समय को लेटेंसी कहा जाता है और इसे मापने की क्रिया को पिंग कहते है।
गुरुवार, 28 नवंबर 2019
WHEN FOUNDED PETROLIUM AND HOW,WHERE जानिए हिंदी मे (IN HINDI)
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पेट्रोलियम कब पाया गया पेट्रोलियम का पूरा इतिहास
मित्रो आज हम बहुत ही खास विषय के बारे मे जानकारी सांझा करनेवाले है आज हम बात करनेवाले है पेट्रोलियम(PETROLIUM) के बारे मे इसका दुसरा नाम गैसोलिन(GASOLINE) है इसे कुछ देशो मे गैसोलिन कहा जाता है
वैसे आज पेट्रोलियम पर बहुत-सी प्रक्रिया करके बहुत से तेल और गैसे प्राप्त किए गए है लेकिन आज हम बताएगे की पेट्रोलियम का इतिहास कैसा था और कैसे यह प्राप्त हुआ।
पेट्रोलियम का मानवता को आगे बढाने मे बहुत बडा योगदान है हमारे दैनिक जीवन मे इसका बहुत उपयोग होता है और यह उपयोग बहुत ज्यादा होने की वजह से आज यह हमारे लिये धीरे-धीरे जहर बनता जा रहा है।
पेट्रोलियम अब विश्व मे कुछ ही समय के लिए बचा है लगभग यह सिर्फ 50-53 सालो के लिए है इसके बाद यह खत्म हो जाएगा क्योंकि यह एक प्राकृतिक संसाधन होने के कारण हम इसे बना नही सकते इसलिए
विश्वभर मे ईधन के रुप बहुत-सी खोजे हो रही है। तो चलिए हम अपने विषय के बारे जानते है :-
तो सबसे पहली बात यह एक प्राकृतिक संसाधन है तो इस वस्तु की खोज नही हो सकती। यह प्रकृति मे बहुत सालो से मौजूद लेकिन इसे पेट्रोल के रुप प्राप्त करने के लिए बहुत साल लगे।
यह एशिया और अमेरिका महाद्वीप पर पानी के कुए जैसे यह तेल प्राकृतिक गढ्ढो मे पाया जाता था और लोगो को ज्यादा ज्ञान न होने के कारण लोगो के लिए यह सिर्फ काला पानी था
ईराक मे इसके बहुत बडे-बडे गढ्ढे थे यहाँ के लोगो ने इससे डामर बनाना सिख लिया और इस डामर का उपयोग टॉवर ओफ बॅबीलोन का निर्माण करने के लिए किया गया क्योंकी यह ज्वलनशील होने के कारण यह प्रकाश निर्माण के काम भी आती थी।
प्राचीनकाल मे चीनीयो ने इसका उपयोग 2000 से भी अधिक पुर्व ईधन के रुप मे किया यह उन्होने अपने देश चीन मे किया
और इसे गढ्ढो मे से यहाँ से वहाँ ले जाने के लिए बांस का उपयोग किया इसके पश्चात यह ईराक मे इस कच्चे तेल को अरबी रसायनजानकारो द्वारा विस्तारित किया जाता था और इसपर एक किताब भी लिखी गई थी जिसका
नाम मुहम्म्द इब्न जकारिया राजी थी तब वह इसका उपयोग सडके बनाने के काम मे करते थे। इसके बावजूद भी ईराक और दुसरे देशो मे इसका सही उपयोग नही जान सके थे
दुसरो के मुकाबले मे और इसी का लाभ कुछ लोगो ने इन देशो मे स्थित इन गढ्ढो का शोषण किया और
इसका वर्णन कई भूगोलको ने किया इसके बाद भी इसे जहाजो मे भर-भर कर ले जाया जाता रहा। इसके बाद इसकी मौजूदगी
पुरे विश्व मे पाने जाने लगी और युरोप मे यह पहली बार पेचेलब्रोन नामक जगह पर पाया गया लेकिन इसके साथ पानी के भी अंश प्राप्त हुए बाद मे इसे कुछ जगहो पर चिकित्सा प्रयोजनो के लिए इसका उपयोग किया गया। लेकिन इसकी खबर
पुरे विश्व मे सिर्फ कुछ ही देशो को थी फिर खनन का एक रुप बन गया और इसपर धीरे-धीरे शोध आरम्भ किए गए। 1851 पहली मे तेल रिफाईनरी का निर्माण किया गया
और यह एक व्ययसाय बनता जा रहा था। लेकिन इग्नेसिस इयुकसैविक्ज(IGNESIS IEWUKASIEWICZ) इस पर गहन शोध किया और एक रिफाईनरी का निर्माण करवाया जिसमे उन्होने अलग-अलग प्रकार के तेल प्राप्त किए जैसे की केरोसिन आदि।
इसके बाद कोलोनेल इडविन ड्रेक(COLONEL EDWIN DRAKE) ने सबसे आधुनिक रिफाईनरी का निर्माण किया बाकी सभी रिफाईनरी तेल के गढ्ढो पर बनाई गई थी
लेकिन कोलोनेल द्वारा बनाई इस रिफाईनरी को जमीन के नीचे से खोदकर तेल प्राप्त करना शुरू कर दिया इससे विश्वभर मे तेल उद्योग मे
क्रांति आई इसके बाद भी ईराक जैसे देशो मे शोषण का काम जारी रहा और कुछ सालो बाद वहा के लोगो को इसके बारे ज्ञात हुआ और वहाँ के लोगो ने उसपर अपना कब्ज़ा कर लिया।
इसके बाद इंजन का आविष्कार होने के बाद से इसपर प्रक्रिया और गहन शोध द्वारा पेट्रोल और अन्य गैसो के बारे मे लोगो ने खुलकर जाना और इसका उपयोग किया।
कांच को कब बनाया और निर्माण किया गया जनिए हिंदी मे(IN HINDI)
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इतिहास कांच का -
स्फटिक
हम सबसे पहले भारत की बात करते है यहाँ यह बहुत पहले ही पाया गया था इसका उपयोग महाभारत एंव रामायण काल मे भी किया गया था और कुछ शास्त्रो मे भी इसके बारे मे उल्लेख किया गया। दर्पण के रुप मे कांच का उपयोग अभी-अभी कुछ 300-350 सालो पहले हुआ उससे पहले यह सजावट के लिए एंव अन्य कार्यो के लिए उपयोग किया जाता था। भारत मे सफ्टिक अथवा क्वार्टज नामक खनिज को कांच के रुप मे उपयोग किया जाता था लेकिन यह कांच पुर्ण रुप से आज के कांच की तरह शुद्ध नही था और यहाँ से कुछ देशो को यह निर्यात भी किया जाता था। भारत मे पहले चेहरा देखने के लिए धातु से बने दर्पण का उपयोग किया जाता था जैसे चांदी,तांबा आदि।
अब बात करते है दुसरे जगहो की लोगो के अनुसार अथवा किवंदती(लोगो की पीढी दर पीढी बताई गई बाते) के अनुसार सर्वप्रथम कांच को मेसोपोटामिया मे ईसा के जन्म के 12000 साल पहले खोजा गया वहाँ यह इस प्रकार पाया की कुछ व्यापारी समुद्रतट पर जब खाना बनाने लिए जब जहाजो से बर्तन उतारे गए और वह अपने साथ कुछ ज्वलनशील वस्तु लाए थे और जब उन्होने खाना बनाना प्रारंभ किया उससे कुछ देर बात रेतीली जगह जहाँ खाना बनाया जा रहा था वहाँ कुछ द्रव्य पदार्थ पिघलकर थोडी देर बाद वह ठोस मे बदल गया और ऐसा ही कुछ सीरिया के फिनिशीया के समुद्रतट पर भी हुआ इसके बाद यह कुछ सालो तक लोगो के गहने और ताबिज बनाने के लिए उपयोग किया जाता था फिर धीरे-धीरे कुछ लोगो ने इसपर प्रयोग किया इसमे मिस्त्रवासियो ने कांच के खुले सांचो को दबाकर तश्तरिया और कटोरे बनाना प्रारम्भ कर दिया।
क्राऊन कांच
फ्लोट कांच
लेंस
ईसायुग के 350 वर्ष पहले फिनिशीयावासियो ने कांच फुंकनी द्वारा फुककर कांच के खोखले पात्र बनाए और यह मानव का एक महान आविष्कार था और यह प्रक्रिया आज भी जीवित है बाद मे यह ईसायुग के आते-आते यह उद्योग मे बदल गया और ईसायुग के प्रारंभ मे यह चरमसीमा पर पहुंच गया और बहुत बडे-बडे प्रयोग हुए और सन 1226 मे "ब्रोड शीट(BROAD SHEET)" का यानि कांच की सतह बनाई गई। सन 1330 को फ्रांस के रौएन मे क्राउन कांच का निर्माण हुआ और इसे आयात-निर्यात किया जाता था।सन 1620 मे "ब्लोअन प्लेट(BLOWN PLATE)" का निर्माण हुआ यह थोडा थाली की तरह दिखाई देता है फिर इसके बाद सन 1678 मे"क्राउन कांच(CROWN GLASS)" की गुणवत्ता मे बदलाव करके उत्तल लेंस और अवतल लेंस बनाने मे किया जाता था जिसके बाद चश्मे का आविष्कार भी हुआ बाद मे 1688 मे "पोलिश्ड प्लेट(POLISHED PLATE)" का शोध हुआऔर इसके ऊपर शोध होता रहा तथा कांच की गुणवत्ता को बढाने का प्रयोग जारी रहा और 1959 को "फ्लोट कांच(FLOTE GLASS") को बाज़ार मे उतारा गया इसके पहले भी कांच के क्षेत्र मे बहुत आविष्कार हुए और यह आज बहुत बडा उद्योग बन गया है।
शुक्रवार, 26 जुलाई 2019
WHAT IS BIO BASED PLASTICS AND BIODEGRADABLE PLASTIC (IN HINDI)
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बायोबेस्ड प्लास्टिक:-
बायोबेस्ड प्लास्टिक यह ऐसी वस्तुओ से बनाया जो की वापस बनाए जा सके(RENEWABLE,नवीकरणीय) ऐसे स्त्रोत से बनाया जाता है। इन नवीकरणीय स्त्रोत मे मक्का,आलु,सोय,चावल और गेहु आदि शामिल है।
इन सभी स्त्रोत से प्लास्टिक बहुलक(PLASTIC POLYMER) तैयार किया जाता है रासायनिक और जैविक प्रकार से।
बायोबेस्ड प्लास्टिक के उदाहरण जैसे की:-
पोलिलॅकटिक अम्ल(POLYLACTIC ACID)- जो की स्टार्च द्वारा प्राप्त की जाती है।
पोलिहाईड्रोक्सीबुटीरेट(POLYHYDROXYBUTYRATE) - यह रोगाणुओ के जुडे संयोग(MICROBIAL SYNTHESIS) के द्वारा बनाया जाता है।
बायोबेस्ड पोलिएथेलेन(POLYETHELENE) - इसे गन्ने से प्राप्त किया जाता है।
बायोबेस्ड प्लास्टिक के फायदे:-
यह अनवीकरणीय पेट्रोलियम पर आधारित वस्तुओ पर के विश्वास को कम करता है।
इससे छोटे पेडो को हरा रखने का घर के उपयोग मे लाई जानेवाली गैस को लगभग 35% तक कम करने मे मदद मिलती है।
यह खेती के गौण-उपज़ को बढाने मे सहायक है और यह ग्रामीण ईलाको मे तथा किसानो को सहायता प्राप्त कराता है।
बायोडीग्रेडेबल प्लास्टिक:-
प्रकृति मे शामिल सुक्ष्मजीवो के घटित अनावरण द्वारा प्लास्टिक को नष्ट किया जाता है प्रकृति द्वारा नष्ट किये गए इस प्रकार के प्लास्टिक को बायोडीग्रेडेबल प्लास्टिक कहते है या नष्ट होनेवाले प्लास्टिक। सभी कार्बनिक पदार्थ अंत मे नष्ट हो जाते है। इसमे परंपरागत तौर पर पेट्रोलियम बेस्ड प्लास्टिक भी शामिल है। लेकिन कार्बनिक पदार्थो बायोडीग्रेशन(नष्ट होना) का अनुपात भिन्न-भिन्न होता है उनके बढते पैमाने पर। यह प्लास्टिक जिसे हम बायोडीग्रेडेबल प्लास्टिक के नाम से जानते है उसे प्रकृति मे नष्ट करने के लिये तैयार किया जाता है ताकि यह विशिष्ट पर्यावरण मे नष्ट हो सके। जैसे की:- समुद्रिय पर्यावरण मे,धूप,मिट्टी मे अथवा खाद बनाने की सुविधा मे।
बायोडीग्रेडेबल प्लास्टिक के फायदे:-
यह पॅकिंग और एक ही वस्तु के उपयोग के लिये उप्युक्त है।
यह उद्यान कृषि के उत्पाद को बढावा देता है।
समुद्रिय पर्यावरण मे यह प्लास्टिक को फैलने से रोकता है।
यह कार्बनिक उपकरण को भराव क्षेत्र मे जाने से रोकता है।
बुधवार, 17 जुलाई 2019
प्लास्टिक कैसे बनता है जानिये हिंदी मे (IN HINDI)
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मित्रो आप सभी प्लास्टिक के बारे मे तो जानते ही होंगे प्लास्टिक का हमारे दैनिक जीवन मे बहुत महत्वपुर्ण योगदान है प्लास्टिक आज कल ज्यादा उपयोग होने की कि वजह से यह हमारे लिए सबसे घातक वस्तुओ मे से एक जाना जाता है। लेकिन आज हम आपको बतानेवाले है की प्लास्टिक बनता कैसे हैं तो चलिए जानते है।
सबसे पहले प्लास्टिक की सामग्री के बारे मे जान लेते है जो की प्राकृतिक और कार्बनिक सामग्री है जैसे की सेल्युलोज,कोयला,प्राकृतिक गैसे,नमक,और महत्वपुर्ण कच्चा तेल। कच्चा तेल बहुत ही जटिल मिश्रण होता है इसमे हज़ारो कि संख्या मे यौगिक पदार्थ शामिल होने के कारण इसे उपयोग करने के पहले परिवर्तित किया जाता है। प्लास्टीक का उत्पादन सबसे पहले कच्चे तेल के स्त्रावण से शुरु की जाती है तेल परिष्करणशाला( OIL REFINERY) मे की जाती है। जिससे की इसमे भारी कच्चे तेल के अवयव( COMPONENTS) हल्के हो जाते है इस प्रक्रिया को खंड अथवा भिन्न अंक( FRACTION) कहते है। हर खंड हाईड्रोकार्बन के मिश्रण की माला( CHAIN) होती है जो की आकार और संरचना मे अलग होती है उनके अणु के। इन सभी सामग्री मे खनिज तेल निर्णायक यौगिक पदार्थ माना जाता है प्लास्टिक के उत्पादन मे। प्लास्टिक उत्पादन के मुलभूत दो प्रकार है पोलिमेराईजेशन तथा पोलिकोंडेनजेशन अथवा यह दोनो विशिष्ट उत्प्रेरक है। पोलिमेराईजेशन के प्रतिघातक(REACTOR) एकलक(MONOMERS) जैसे की इथीलेन और प्रोपीलेन यह आपस मे जुडकर बहुलक(POLYMER) माला के रुप मे बने होते है और हर एक बहुलक का अपना गुण(PROPERTIES),संरचना(STRUCTURE) तथा आकार(SIZE) होता है।
वैसे तो बहुत सारे प्रकार के प्लास्टिक होते है लेकिन उन सभी को दो भागो मे विभाजित किया गया है।
1) थर्मोप्लास्टिक - इसे गरम करने पर यह नरम हो जाता है और बाद मे यह थंडा होने के बाद फिर से ठोस हो जाता है
2) थर्मोसेट्स - यह नरम नही होता है एकबार आकार देने या ठोस होने के बाद।
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थर्मोप्लास्टिक के उदाहरण |
थर्मोसेट्स के उदाहरण |
एक्रीलोनिट्राईल बुटाडाईन स्टीरेन (ACRYLONITRILE BUTADIENE STYRENE,ABS) |
ईपोक्साईड (EPOXIDE,EP) |
पोलिकार्बोनेट (POLYCARBONATE,PC) |
फेनोल-फोरमलडेहाईड (PHENOL-FORMALDEHYDE,PF) |
पोलिईथेलेन (POLYETHYLENE,PE) |
पोलियुरेथन (POLYURETHANE,PUR) |
पोलिईथेलेन टेरेफ्थलेट (POLYETHYLENE TEREPHTHALATE,PET) |
पोलिटेट्राफ्लुरोईथेलेन (POLYTETRAFLUOROETHYLENE,PTFE) |
पोलिविन्यल क्लोराईड (POLYVINYL CHLORIDE,PVC) |
अनस्याचुरेटेड पोलिस्टर रेजिन (UNSATURATED POLYESTER RESIN,UP) |
पोलिमेथ्यल मेथाक्रायलेट (POLYMETHYL METHACRYLATE,PMMA) |
|
पोलिप्रोपीलेन (POLYPROPYLENE,PP) |
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पोलिस्टीरेन (POLYSTYRENE,PS) |
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एक्सपांडेड पोलिस्टीरेन (EXPANDED POLYSTYRENE,EPS) |
बुधवार, 3 जुलाई 2019
जानिए कागज कैसे बनता है HOW TO MAKE PAPER (IN HINDI) जानिए हिन्दी में
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दोस्तो आज ह्म बहुत ही रोचक विषय के बारे मे जानेंगे यह विषय इतिहास से जुडा हुआ है तो चलिये जानते है :- मित्रो आज हम कगज के बारे मे जानेंगे। कागज का उपयोग लिखने तथा छपाई के लिए किया जाता है और इसका मानव सभ्यता के विकास मे बहुत बडा योगदान है। इतिहासकारो का मानना है की पह्ला कागज कपडो के चिथडो से चीन मे बनाया गया। कागज पौधो, पेडो से बनाया जाता है। पौधो मे सेल्युलोज़ नामक एक कार्बोहाइड्रेट पाया जाता है जो पौधो के पंजर का मुख्य पदार्थ होता है। गीले तंतुओ को दबाकर और सुखाकर कागज का निर्माण किया जाता है इन तंतुओ को सेल्युलोज कि लुगदि कहा जाता है।
सेल्युलोज के रेशो को परस्पर एक समान जुटकर चद्दर के रुप मे बनाया जाता है इस प्रकार चद्दर के रुप तैयार होने का गुण केवल सेल्युलोज के रेशो मे होता है। जिस पौधे मे सेल्युलोज अच्छी मात्रा मे पाया जाता है उसका उपयोग कागज बनाने मे किया जाता है। पौधो मे सेल्युलोज के अलावा कई और पदार्थ मिले हुए रह्ते है जैसे की लिग्निन,पेक्टिन,खनिज लवण और वसा तथा रंग पदार्थ सुक्ष्म मात्रा मे होते है अत: जब तक इन्हे निकालकर पर्याप्त मात्रा मे सेल्युलोज नही मिल जाता इन पदार्थो को निकालने की प्रक्रिया चालु रह्ती है। इनमे से लिग्निन का निकालना बहुत आवश्यक है क्योंकि इससे सेल्युलोज के रेशे प्राप्त करना कठिन होता है शुरुआत मे जब शुद्ध सेल्युलोज निकालने की कोई अच्छी विधि नही थी तब तक कागज सुती कपडो से बनाया जाता था इनसे कागज बनाना बहुत सरल और उच्च कोटी का प्राप्त होता था।
जितना अधिक शुद्ध सेल्युलोज होता कागज उतना स्वच्छ और सुंदर बनता है। रुई भी शुद्ध सेल्युलोज ही है लेकिन यह कपडा बनाने के उपयोग मे आती है क्योंकि यह मंहगी होती है और इसमे परस्पर जुटने का गुण नही होता है। कागज की रद्दी और कपडे के चिथडो मे भी सेल्युलोज ज्यादा मात्रा मे पाया जाता है इनसे भी कागज निर्माण किया जाता है। आज कल मुख्य रुप से कागज बनाने मे चिथडे, कागज की रद्दी, और बांस तथा स्प्रुस,चीड,घांसे जैसे सबई,एस्पार्टो का उपयोग किया जाता है। भारत मे बांस और सबई घांस का उपयोग ज्यादा किया जाता है।
कागज का अधिक उपयोग होना यह पर्यावरण के लिए बहुत ही गंभीर विषय है इसका उपयोग ज्यादा होने के कारण पर्यावरण पर बहुत बुरा प्रभाव पडा है। विश्व मे जितने भी पेड काटे जाते है उनमे से 35% कटे हुए पेडो का उपयोग कागज बनाने मे किए जाते है। भारत मे 2017-2018 की गणना के अनुसार 2017-2018 मे कुल 2.3 करोड टन कागज का उपयोग हुआ गणना के अनुसार 2019-2020 मे बढकर 2.5 करोड हो सकती है। कागज को सफेद के उपाय बहुत ही नुकसानदायक है जिससे पर्यावरण मे क्लोरिन और क्लोरिनेटेड डाईऑक्सिन छोडते है जो पर्यावरण के लिए बहुत खतरनाक है यह एक प्रकार का प्रधुशक है जिसके प्रयोग पर अंतर्राष्ट्रिय नियंत्रण है। यह गैस बहुत ही हानिकारक है इसका मानव जीवन पर खतरनाक प्रभाव है जैसे प्रजनन,विकास पर और बिमारी से प्रतिरक्षा, हर्मोन सम्बंधी सम्स्याए शामिल है। मानवो मे 80-90% डाईऑक्सिन भोजन द्वारा आता है यह कारखानो द्वारा पर्यावरण मे छोडा जाता है और यह जानवरो द्वारा मानवो तक पहुच जाता है यह( डाईऑक्सिन) पशुओ की चर्बि मे जमा हो जाते है अर्थात यह पशुओ के दुध,मांस और मछली द्वारा मनुष्य तक आता है जिससे गंभिर बिमारी का निर्माण होता है। इसलिए कागज का उपयोग संभाल कर करना चाहिए और कम करना चाहिए ताकि पर्यावरण को कम हानि होने से बचा सके।
गुरुवार, 13 जून 2019
क्या आप जानते है ? कौनसा राज्य कब बना ? जानिए हिंदी मे (IN HINDI)
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हमारे भारत देश का मानचित्र आज जिस प्रकार से दिखाई देता है यह आज़ादी के पहले वैसा नही था। आज़ादी के पहले भारत मे बहुत सारी रियासते थी उनमे से कुछ रियासते इस नये भारत मे शामिल नहीं होना चाहती थी बाद मे उन सभी को एकजुट होना पडा इसके बाद निर्माण हुआ हमारा पुर्ण भारत। आज हम आपको बताएंगे की आजादी बाद कौन-से राज्य कब भारत मे सम्मिलित हुए। नीचे सभी राज्यो की तालिका दी गई है जिनमे क्रमांक,तालिका और राज्य कब निर्माण हुआ उसकी जानकारी दी गई है।
क्रमांक |
राज्य का नाम |
अलग राज्य घोषित करने का दिन |
1 |
बिहार |
1 अप्रेल 1936 |
2 |
असम |
15 अगस्त 1947 |
3 |
जम्मु और कश्मिर |
26 अक्तुबर 1947 |
4 |
उत्तर प्रदेश |
26 जनवरी 1950 |
5 |
तमिलनाडु |
26 जनवरी 1950 |
6 |
आंध्र प्रदेश |
1 अक्तुबर 1953 |
7 |
पुद्दुचेरी |
1 नव्म्बर 1954 |
8 |
राजस्थान |
1 नव्म्बर 1956 |
9 |
अंदमान और निकोबार |
1 नव्म्बर 1956 |
10 |
लक्ष्यदीप |
1 नव्म्बर 1956 |
11 |
पश्चिम बंगाल |
1 नव्म्बर 1956 |
12 |
कर्नाट्क |
1 नव्म्बर 1956 |
13 |
दिल्ली |
1956 |
14 |
मध्य प्रदेश |
1 नव्म्बर 1956 |
15 |
केरल |
1 नव्म्बर 1956 |
16 |
उडिसा |
1 अप्रेल 1956 |
17 |
गुजरात |
1 मई 1960 |
18 |
महाराष्टृ |
1 मई 1960 |
19 |
गोवा |
30 मई 1961 |
20 |
दादर और नगर हवेली |
11 अगस्त 1961 |
21 |
नागालैंड |
1 दिसम्बर 1963 |
22 |
चंडीगड |
1 नव्म्बर 1966 |
23 |
पंजाब |
1 नव्म्बर 1966 |
24 |
हरयाणा |
1 नव्म्बर 1966 |
25 |
हिमाचल प्रदेश |
25 जनवरी 1971 |
26 |
मेघालय |
20 जनवरी 1972 |
27 |
मणिपुर |
21 जनवरी 1972 |
28 |
त्रिपुरा |
21 जनवरी 1972 |
29 |
सिक्किम |
16 मई 1975 |
30 |
अरुणाचल प्रदेश |
20 फरवरी 1987 |
31 |
मिज़ोरम |
20 फरवरी 1987 |
32 |
दमन और दिहू |
23 मई 1987 |
33 |
उत्तराखंड |
9 नव्म्बर 2000 |
34 |
झारखंड |
15 नव्म्बर 2000 |
35 |
छत्तीसगढ |
15 नव्म्बर 2000 |
36 |
तेलंगाना |
2 जुन 2014 |
3 |
लद्दाख |
31 अक्टुबर2019 |
दी गई तालिका मे बिहार यह राज्य आज़ादी के पहले निर्माण हुआ था और बाकी के राज्य आज़ादी के समय या उसके बाद निर्माण किए।
मंगलवार, 11 दिसंबर 2018
ये है भारत के शक्तिशाली सुपर कंप्यूटर्स जो दुनिया के 500 शक्तिशाली सुपरकंप्यूटर्स में गिने जाते है जानिए हिंदी मे (IN HINDI
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नवम्बर की सुपरकंप्यूटर गणना के अनुसार भारत के चार(4) सुपरकंप्यूटर्स(SUPERCOMPUTERS) विश्व के सबसे सर्वोच्च पांचसौ(TOP 500) सुपरकंप्यूटर्स मे दर्ज है जिनकी तालिका(LIST,TABLE) नीचे दर्शायी गई है और तालिका के नीचे विस्तार से बताया गया है।

● प्रत्युष यह सुपरकंप्यूटर विश्व के पैंतालीसवे(45th) स्थान पर स्थापित है और यह भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान (इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मैट्रोलोजी,INDIAN INSTITUTE OF TROPICAL METROLOGY) द्वारा उपयोग किया जाता है जो की महाराष्ट्र के पुणे में स्थित है। इसे क्रे इंकॉर्पोरेशन द्वारा बनाया गया है। इसमें 1,19,232 कोर्स(core) लगे हुए है और एक्सेओं ई5-2695वी4 18सी 2.1गीगाहर्ट्ज़ (XEON E5-2695v4 18C 2.1GHZ का प्रोसेसर लगा हुआ है। अब बात करते है इसकी तेजी की तो इसका आरमॅक्स(Rmax) है 3763.94 टेराफ्लोप्स और इसका आरपीक(Rpeak) है 4006.2 टेराफ्लोप्स तथा एनमॅक्स(Nmax) 5935104 है। यह सुपरकंप्यूटर 1353.23 किलोवॉट की विद्युत् शक्ति(POWER) पर चलता है और इसकी ऑपरेटिंग प्रणाली क्रे लिनक्स एनवायरनमेंट है तथा यह एरीज इंटरकनेक्ट द्वारा इंटरकनेक्टेड है।

● तिहत्तरवां(73th) पद प्राप्त करनेवाला यह सुपरकंप्यूटर भारत का दूसरा सुपरकंप्यूटर है जिसने विश्व के सबसे सर्वोच्च 500 सुपरकंप्यूटर में स्थान प्राप्त किया है जिसका नाम मिहिर है। इसे भी क्रे इंकॉर्पोरेशन द्वारा निर्माण किया गया है और इसे नॅशनल सेंटर फॉर मीडियम रेंज वेदर फोरकास्टिंग(NATIONAL CENTER FOR MEDIUM RANGE WEATHER FORECASTING) मे उपयोग किया जाता है। इसमें कुल मिलाकर 83,592 कोर्स(cores) लगे हुए है। मिहिर में एक्सेओं ई5-2695वी4 18सी 2.1गीगाहर्ट्ज़ (XEON E5-2695v4 18C 2.1GHZ प्रोसेसर लगा हुआ है। इस सुपरकंप्यूटर का आरमॅक्स 2570.4 और आरपीक 2808.68 है तथा एनमॅक्स 3349440 तक है। इस सुपरकंप्यूटर पर उपयोग की जानेवाली विद्युत् शक्ति 954.73 है। मिहिर की ऑपरेटिंग प्रणाली क्रे लिनक्स एनवायरनमेंट है और यह एरीज इंटरकनेक्ट द्वारा इंटरकनेक्टेड है।
● आईएनसी1(Inc1) यह सुपरकंप्यूटर तीनसौ सैतीसवां(337th) पद प्राप्त करनेवाला यह सुपरकंप्यूटर लेनोवो(LENOVO) नामक एक सॉफ्टवेयर कंपनी द्वारा बनाया गया है और यही सॉफ्टवेयर कंपनी इसका उपयोग करती है। इसमें 38,400 कोर्स(cores) लगे हुए है और इसमें एक्सेओं ई5-2673वी4 20सी 2.3गीगाहर्ट्ज़ (XEON E5-2673v4 20C 2.3GHZ) प्रोसेसर लगे हुए है। इस सुपरकंप्यूटर का आरमॅक्स 1123.15 टेराफ्लोप्स है और आरपीक 1413.12 टेराफ्लोप्स है अथवा इसका एनमॅक्स 70,10,880 है। इस कंप्यूटर की स्टोरेज 4,91,520 जीबी(GB) है और यह लिनक्स ऑपरेटिंग प्रणाली पर काम करता है तथा यह 40जी ईथरनेट(40G ETHERNET) से इंटरकनेक्टेड है।

● चारसौअट्ठासीवें(488th) स्थान पर स्थापित यह सुपरकंप्यूटर भारत का चौथा सुपरकंप्यूटर है और यह भी क्रे इंकॉर्पोरेशन द्वारा निर्माण किया गया है जिसका नाम एसईआरसी(SERC) है इसे कर्नाटक में स्थित बंगलुरु शहर के सुपरकंप्यूटर एजुकेशन एंड रिसर्च सेंटर(SUPERCOMPUTER EDUCATION AND RESEARCH CENTER) अर्थात इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस(INDIAN INSTITUTE OF SCIENCE) मे उपयोग किया जाता है। इसमें कुल मिलाकर 31,104 कोर्स(cores) है और इसमें एक्सेओं ई5-2680वी4 12सी 2.5गीगाहर्ट्ज़ (XEON E5-2680v4 12C 2.5GHZ प्रोसेसर लगा हुआ है। इस सुपरकंप्यूटर का आरमॅक्स(Rmax) 901.506 टेराफ्लोप्स है और आरपीक 1244.16 टेराफ्लोप्स है। यह 607.50 किलोवॉट की विद्युत् शक्ति पर संचालित है। इसकी भी ऑपरेटिंग प्रणाली क्रे लिनक्स एनवायरनमेंट है और यह एरीज इंटरकनेक्ट द्वारा इंटरकनेक्टेड है।
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