गुरुवार, 28 नवंबर 2019

WHEN FOUNDED PETROLIUM AND HOW,WHERE जानिए हिंदी मे (IN HINDI)



अगर आप इस पोस्ट या वेबसाइट से जुडे अपडेट देखना चाहते है या इस वेबसाइट के नए पोस्ट देखना चाहते है
तो आप नीचे दिए गए वेबसाइट के बटन पर क्लिक करे







पेट्रोलियम कब पाया गया पेट्रोलियम का पूरा इतिहास



मित्रो आज हम बहुत ही खास विषय के बारे मे जानकारी सांझा करनेवाले है आज हम बात करनेवाले है पेट्रोलियम(PETROLIUM) के बारे मे इसका दुसरा नाम गैसोलिन(GASOLINE) है इसे कुछ देशो मे गैसोलिन कहा जाता है वैसे आज पेट्रोलियम पर बहुत-सी प्रक्रिया करके बहुत से तेल और गैसे प्राप्त किए गए है लेकिन आज हम बताएगे की पेट्रोलियम का इतिहास कैसा था और कैसे यह प्राप्त हुआ। पेट्रोलियम का मानवता को आगे बढाने मे बहुत बडा योगदान है हमारे दैनिक जीवन मे इसका बहुत उपयोग होता है और यह उपयोग बहुत ज्यादा होने की वजह से आज यह हमारे लिये धीरे-धीरे जहर बनता जा रहा है। पेट्रोलियम अब विश्व मे कुछ ही समय के लिए बचा है लगभग यह सिर्फ 50-53 सालो के लिए है इसके बाद यह खत्म हो जाएगा क्योंकि यह एक प्राकृतिक संसाधन होने के कारण हम इसे बना नही सकते इसलिए विश्वभर मे ईधन के रुप बहुत-सी खोजे हो रही है। तो चलिए हम अपने विषय के बारे जानते है :-


तो सबसे पहली बात यह एक प्राकृतिक संसाधन है तो इस वस्तु की खोज नही हो सकती। यह प्रकृति मे बहुत सालो से मौजूद लेकिन इसे पेट्रोल के रुप प्राप्त करने के लिए बहुत साल लगे। यह एशिया और अमेरिका महाद्वीप पर पानी के कुए जैसे यह तेल प्राकृतिक गढ्ढो मे पाया जाता था और लोगो को ज्यादा ज्ञान न होने के कारण लोगो के लिए यह सिर्फ काला पानी था ईराक मे इसके बहुत बडे-बडे गढ्ढे थे यहाँ के लोगो ने इससे डामर बनाना सिख लिया और इस डामर का उपयोग टॉवर ओफ बॅबीलोन का निर्माण करने के लिए किया गया क्योंकी यह ज्वलनशील होने के कारण यह प्रकाश निर्माण के काम भी आती थी। प्राचीनकाल मे चीनीयो ने इसका उपयोग 2000 से भी अधिक पुर्व ईधन के रुप मे किया यह उन्होने अपने देश चीन मे किया और इसे गढ्ढो मे से यहाँ से वहाँ ले जाने के लिए बांस का उपयोग किया इसके पश्चात यह ईराक मे इस कच्चे तेल को अरबी रसायनजानकारो द्वारा विस्तारित किया जाता था और इसपर एक किताब भी लिखी गई थी जिसका नाम मुहम्म्द इब्न जकारिया राजी थी तब वह इसका उपयोग सडके बनाने के काम मे करते थे। इसके बावजूद भी ईराक और दुसरे देशो मे इसका सही उपयोग नही जान सके थे दुसरो के मुकाबले मे और इसी का लाभ कुछ लोगो ने इन देशो मे स्थित इन गढ्ढो का शोषण किया और इसका वर्णन कई भूगोलको ने किया इसके बाद भी इसे जहाजो मे भर-भर कर ले जाया जाता रहा। इसके बाद इसकी मौजूदगी पुरे विश्व मे पाने जाने लगी और युरोप मे यह पहली बार पेचेलब्रोन नामक जगह पर पाया गया लेकिन इसके साथ पानी के भी अंश प्राप्त हुए बाद मे इसे कुछ जगहो पर चिकित्सा प्रयोजनो के लिए इसका उपयोग किया गया। लेकिन इसकी खबर पुरे विश्व मे सिर्फ कुछ ही देशो को थी फिर खनन का एक रुप बन गया और इसपर धीरे-धीरे शोध आरम्भ किए गए। 1851 पहली मे तेल रिफाईनरी का निर्माण किया गया और यह एक व्ययसाय बनता जा रहा था। लेकिन इग्नेसिस इयुकसैविक्ज(IGNESIS IEWUKASIEWICZ) इस पर गहन शोध किया और एक रिफाईनरी का निर्माण करवाया जिसमे उन्होने अलग-अलग प्रकार के तेल प्राप्त किए जैसे की केरोसिन आदि। इसके बाद कोलोनेल इडविन ड्रेक(COLONEL EDWIN DRAKE) ने सबसे आधुनिक रिफाईनरी का निर्माण किया बाकी सभी रिफाईनरी तेल के गढ्ढो पर बनाई गई थी लेकिन कोलोनेल द्वारा बनाई इस रिफाईनरी को जमीन के नीचे से खोदकर तेल प्राप्त करना शुरू कर दिया इससे विश्वभर मे तेल उद्योग मे क्रांति आई इसके बाद भी ईराक जैसे देशो मे शोषण का काम जारी रहा और कुछ सालो बाद वहा के लोगो को इसके बारे ज्ञात हुआ और वहाँ के लोगो ने उसपर अपना कब्ज़ा कर लिया। इसके बाद इंजन का आविष्कार होने के बाद से इसपर प्रक्रिया और गहन शोध द्वारा पेट्रोल और अन्य गैसो के बारे मे लोगो ने खुलकर जाना और इसका उपयोग किया।

कांच को कब बनाया और निर्माण किया गया जनिए हिंदी मे(IN HINDI)



अगर आप इस पोस्ट या वेबसाइट से जुडे अपडेट देखना चाहते है या इस वेबसाइट के नए पोस्ट देखना चाहते है
तो आप नीचे दिए गए वेबसाइट के बटन पर क्लिक करे







इतिहास कांच का -


कांच,शीशा अथवा ग्लास(GLASS) का इतिहास बहुत पुराना है इसका उल्लेख भारतीय शास्त्रो मे भी मिलता है। कांच को इतिहास मे लगभग हर जगह पाया गया इसे भारत मे भी पाया गया और युरोपीय महाद्वीपो पर भी पाया जाता था इनमे अंतर इतना था की सभी ने इसे अपने-अपने हिसाब से उपयोग किया और उसपर प्रयोग किया गया था। आज हम आपको कांच का संपुर्ण इतिहास बतानेवाले है कि कैसे वह प्रकृति मे स्थित था और कैसे उसने चेहरा देखनेवाला दर्पण बना।

                                                                                           स्फटिक

हम सबसे पहले भारत की बात करते है यहाँ यह बहुत पहले ही पाया गया था इसका उपयोग महाभारत एंव रामायण काल मे भी किया गया था और कुछ शास्त्रो मे भी इसके बारे मे उल्लेख किया गया। दर्पण के रुप मे कांच का उपयोग अभी-अभी कुछ 300-350 सालो पहले हुआ उससे पहले यह सजावट के लिए एंव अन्य कार्यो के लिए उपयोग किया जाता था। भारत मे सफ्टिक अथवा क्वार्टज नामक खनिज को कांच के रुप मे उपयोग किया जाता था लेकिन यह कांच पुर्ण रुप से आज के कांच की तरह शुद्ध नही था और यहाँ से कुछ देशो को यह निर्यात भी किया जाता था। भारत मे पहले चेहरा देखने के लिए धातु से बने दर्पण का उपयोग किया जाता था जैसे चांदी,तांबा आदि।
 अब बात करते है दुसरे जगहो की लोगो के अनुसार अथवा किवंदती(लोगो की पीढी दर पीढी बताई गई बाते) के अनुसार सर्वप्रथम कांच को मेसोपोटामिया मे ईसा के जन्म के 12000 साल पहले खोजा गया वहाँ यह इस प्रकार पाया की कुछ व्यापारी समुद्रतट पर जब खाना बनाने लिए जब जहाजो से बर्तन उतारे गए और वह अपने साथ कुछ ज्वलनशील वस्तु लाए थे और जब उन्होने खाना बनाना प्रारंभ किया उससे कुछ देर बात रेतीली जगह जहाँ खाना बनाया जा रहा था वहाँ कुछ द्रव्य पदार्थ पिघलकर थोडी देर बाद वह ठोस मे बदल गया और ऐसा ही कुछ सीरिया के फिनिशीया के समुद्रतट पर भी हुआ इसके बाद यह कुछ सालो तक लोगो के गहने और ताबिज बनाने के लिए उपयोग किया जाता था फिर धीरे-धीरे कुछ लोगो ने इसपर प्रयोग किया इसमे मिस्त्रवासियो ने कांच के खुले सांचो को दबाकर तश्तरिया और कटोरे बनाना प्रारम्भ कर दिया।

                                                                                             क्राऊन कांच


                                                                                          फ्लोट कांच


                                                                                                लेंस

 ईसायुग के 350 वर्ष पहले फिनिशीयावासियो ने कांच फुंकनी द्वारा फुककर कांच के खोखले पात्र बनाए और यह मानव का एक महान आविष्कार था और यह प्रक्रिया आज भी जीवित है बाद मे यह ईसायुग के आते-आते यह उद्योग मे बदल गया और ईसायुग के प्रारंभ मे यह चरमसीमा पर पहुंच गया और बहुत बडे-बडे प्रयोग हुए और सन 1226 मे "ब्रोड शीट(BROAD SHEET)" का यानि कांच की सतह बनाई गई। सन 1330 को फ्रांस के रौएन मे क्राउन कांच का निर्माण हुआ और इसे आयात-निर्यात किया जाता था।सन 1620 मे "ब्लोअन प्लेट(BLOWN PLATE)" का निर्माण हुआ यह थोडा थाली की तरह दिखाई देता है फिर इसके बाद सन 1678 मे"क्राउन कांच(CROWN GLASS)" की गुणवत्ता मे बदलाव करके उत्तल लेंस और अवतल लेंस बनाने मे किया जाता था जिसके बाद चश्मे का आविष्कार भी हुआ बाद मे 1688 मे "पोलिश्ड प्लेट(POLISHED PLATE)" का शोध हुआऔर इसके ऊपर शोध होता रहा तथा कांच की गुणवत्ता को बढाने का प्रयोग जारी रहा और 1959 को "फ्लोट कांच(FLOTE GLASS") को बाज़ार मे उतारा गया इसके पहले भी कांच के क्षेत्र मे बहुत आविष्कार हुए और यह आज बहुत बडा उद्योग बन गया है।

शुक्रवार, 26 जुलाई 2019

WHAT IS BIO BASED PLASTICS AND BIODEGRADABLE PLASTIC (IN HINDI)



अगर आप इस पोस्ट या वेबसाइट से जुडे अपडेट देखना चाहते है या इस वेबसाइट के नए पोस्ट देखना चाहते है
तो आप नीचे दिए गए वेबसाइट के बटन पर क्लिक करे







बायोबेस्ड प्लास्टिक:-

बायोबेस्ड प्लास्टिक यह ऐसी वस्तुओ से बनाया जो की वापस बनाए जा सके(RENEWABLE,नवीकरणीय) ऐसे स्त्रोत से बनाया जाता है। इन नवीकरणीय स्त्रोत मे मक्का,आलु,सोय,चावल और गेहु आदि शामिल है। इन सभी स्त्रोत से प्लास्टिक बहुलक(PLASTIC POLYMER) तैयार किया जाता है रासायनिक और जैविक प्रकार से। बायोबेस्ड प्लास्टिक के उदाहरण जैसे की:-

पोलिलॅकटिक अम्ल(POLYLACTIC ACID)‌‌- जो की स्टार्च द्वारा प्राप्त की जाती है।
पोलिहाईड्रोक्सीबुटीरेट(POLYHYDROXYBUTYRATE) - यह रोगाणुओ के जुडे संयोग(MICROBIAL SYNTHESIS) के द्वारा बनाया जाता है।
बायोबेस्ड पोलिएथेलेन(POLYETHELENE) - इसे गन्ने से प्राप्त किया जाता है।


बायोबेस्ड प्लास्टिक के फायदे:-

यह अनवीकरणीय पेट्रोलियम पर आधारित वस्तुओ पर के विश्वास को कम करता है।

इससे छोटे पेडो को हरा रखने का घर के उपयोग मे लाई जानेवाली गैस को लगभग 35% तक कम करने मे मदद मिलती है।

यह खेती के गौण-उपज़ को बढाने मे सहायक है और यह ग्रामीण ईलाको मे तथा किसानो को सहायता प्राप्त कराता है।

बायोडीग्रेडेबल प्लास्टिक:-

प्रकृति मे शामिल सुक्ष्मजीवो के घटित अनावरण द्वारा प्लास्टिक को नष्ट किया जाता है प्रकृति द्वारा नष्ट किये गए इस प्रकार के प्लास्टिक को बायोडीग्रेडेबल प्लास्टिक कहते है या नष्ट होनेवाले प्लास्टिक। सभी कार्बनिक पदार्थ अंत मे नष्ट हो जाते है। इसमे परंपरागत तौर पर पेट्रोलियम बेस्ड प्लास्टिक भी शामिल है। लेकिन कार्बनिक पदार्थो बायोडीग्रेशन(नष्ट होना) का अनुपात भिन्न-भिन्न होता है उनके बढते पैमाने पर। यह प्लास्टिक जिसे हम बायोडीग्रेडेबल प्लास्टिक के नाम से जानते है उसे प्रकृति मे नष्ट करने के लिये तैयार किया जाता है ताकि यह विशिष्ट पर्यावरण मे नष्ट हो सके। जैसे की:- समुद्रिय पर्यावरण मे,धूप,मिट्टी मे अथवा खाद बनाने की सुविधा मे।

बायोडीग्रेडेबल प्लास्टिक के फायदे:-

यह पॅकिंग और एक ही वस्तु के उपयोग के लिये उप्युक्त है।
यह उद्यान कृषि के उत्पाद को बढावा देता है।
समुद्रिय पर्यावरण मे यह प्लास्टिक को फैलने से रोकता है।
यह कार्बनिक उपकरण को भराव क्षेत्र मे जाने से रोकता है।

बुधवार, 17 जुलाई 2019

प्लास्टिक कैसे बनता है जानिये हिंदी मे (IN HINDI)



अगर आप इस पोस्ट या वेबसाइट से जुडे अपडेट देखना चाहते है या इस वेबसाइट के नए पोस्ट देखना चाहते है
तो आप नीचे दिए गए वेबसाइट के बटन पर क्लिक करे









मित्रो आप सभी प्लास्टिक के बारे मे तो जानते ही होंगे प्लास्टिक का हमारे दैनिक जीवन मे बहुत महत्वपुर्ण योगदान है प्लास्टिक आज कल ज्यादा उपयोग होने की कि वजह से यह हमारे लिए सबसे घातक वस्तुओ मे से एक जाना जाता है। लेकिन आज हम आपको बतानेवाले है की प्लास्टिक बनता कैसे हैं तो चलिए जानते है।


सबसे पहले प्लास्टिक की सामग्री के बारे मे जान लेते है जो की प्राकृतिक और कार्बनिक सामग्री है जैसे की सेल्युलोज,कोयला,प्राकृतिक गैसे,नमक,और महत्वपुर्ण कच्चा तेल। कच्चा तेल बहुत ही जटिल मिश्रण होता है इसमे हज़ारो कि संख्या मे यौगिक पदार्थ शामिल होने के कारण इसे उपयोग करने के पहले परिवर्तित किया जाता है। प्लास्टीक का उत्पादन सबसे पहले कच्चे तेल के स्त्रावण से शुरु की जाती है तेल परिष्करणशाला( OIL REFINERY) मे की जाती है। जिससे की इसमे भारी कच्चे तेल के अवयव( COMPONENTS) हल्के हो जाते है इस प्रक्रिया को खंड अथवा भिन्न अंक( FRACTION) कहते है। हर खंड हाईड्रोकार्बन के मिश्रण की माला( CHAIN) होती है जो की आकार और संरचना मे अलग होती है उनके अणु के। इन सभी सामग्री मे खनिज तेल निर्णायक यौगिक पदार्थ माना जाता है प्लास्टिक के उत्पादन मे। प्लास्टिक उत्पादन के मुलभूत दो प्रकार है पोलिमेराईजेशन तथा पोलिकोंडेनजेशन अथवा यह दोनो विशिष्ट उत्प्रेरक है। पोलिमेराईजेशन के प्रतिघातक(REACTOR) एकलक(MONOMERS) जैसे की इथीलेन और प्रोपीलेन यह आपस मे जुडकर बहुलक(POLYMER) माला के रुप मे बने होते है और हर एक बहुलक का अपना गुण(PROPERTIES),संरचना(STRUCTURE) तथा आकार(SIZE) होता है।


वैसे तो बहुत सारे प्रकार के प्लास्टिक होते है लेकिन उन सभी को दो भागो मे विभाजित किया गया है।
1) थर्मोप्लास्टिक - इसे गरम करने पर यह नरम हो जाता है और बाद मे यह थंडा होने के बाद फिर से ठोस हो जाता है
2) थर्मोसेट्स - यह नरम नही होता है एकबार आकार देने या ठोस होने के बाद।



#ref-menu

थर्मोप्लास्टिक के उदाहरण

थर्मोसेट्स के उदाहरण

एक्रीलोनिट्राईल बुटाडाईन स्टीरेन (ACRYLONITRILE BUTADIENE STYRENE,ABS)

ईपोक्साईड (EPOXIDE,EP)

पोलिकार्बोनेट (POLYCARBONATE,PC)

फेनोल-फोरमलडेहाईड (PHENOL-FORMALDEHYDE,PF)

पोलिईथेलेन (POLYETHYLENE,PE)

पोलियुरेथन (POLYURETHANE,PUR)

पोलिईथेलेन टेरेफ्थलेट (POLYETHYLENE TEREPHTHALATE,PET)

पोलिटेट्राफ्लुरोईथेलेन (POLYTETRAFLUOROETHYLENE,PTFE)

पोलिविन्यल क्लोराईड (POLYVINYL CHLORIDE,PVC)

अनस्याचुरेटेड पोलिस्टर रेजिन (UNSATURATED POLYESTER RESIN,UP)

पोलिमेथ्यल मेथाक्रायलेट (POLYMETHYL METHACRYLATE,PMMA)

पोलिप्रोपीलेन (POLYPROPYLENE,PP)

पोलिस्टीरेन (POLYSTYRENE,PS)

एक्सपांडेड पोलिस्टीरेन (EXPANDED POLYSTYRENE,EPS)

बुधवार, 3 जुलाई 2019

जानिए कागज कैसे बनता है HOW TO MAKE PAPER (IN HINDI) जानिए हिन्दी में



अगर आप इस पोस्ट या वेबसाइट से जुडे अपडेट देखना चाहते है या इस वेबसाइट के नए पोस्ट देखना चाहते है
तो आप नीचे दिए गए वेबसाइट के बटन पर क्लिक करे







दोस्तो आज ह्म बहुत ही रोचक विषय के बारे मे जानेंगे यह विषय इतिहास से जुडा हुआ है तो चलिये जानते है :- मित्रो आज हम कगज के बारे मे जानेंगे। कागज का उपयोग लिखने तथा छपाई के लिए किया जाता है और इसका मानव सभ्यता के विकास मे बहुत बडा योगदान है। इतिहासकारो का मानना है की पह्ला कागज कपडो के चिथडो से चीन मे बनाया गया। कागज पौधो, पेडो से बनाया जाता है। पौधो मे सेल्युलोज़ नामक एक कार्बोहाइड्रेट पाया जाता है जो पौधो के पंजर का मुख्य पदार्थ होता है। गीले तंतुओ को दबाकर और सुखाकर कागज का निर्माण किया जाता है इन तंतुओ को सेल्युलोज कि लुगदि कहा जाता है।


सेल्युलोज के रेशो को परस्पर एक समान जुटकर चद्दर के रुप मे बनाया जाता है इस प्रकार चद्दर के रुप तैयार होने का गुण केवल सेल्युलोज के रेशो मे होता है। जिस पौधे मे सेल्युलोज अच्छी मात्रा मे पाया जाता है उसका उपयोग कागज बनाने मे किया जाता है। पौधो मे सेल्युलोज के अलावा कई और पदार्थ मिले हुए रह्ते है जैसे की लिग्निन,पेक्टिन,खनिज लवण और वसा तथा रंग पदार्थ सुक्ष्म मात्रा मे होते है अत: जब तक इन्हे निकालकर पर्याप्त मात्रा मे सेल्युलोज नही मिल जाता इन पदार्थो को निकालने की प्रक्रिया चालु रह्ती है। इनमे से लिग्निन का निकालना बहुत आवश्यक है क्योंकि इससे सेल्युलोज के रेशे प्राप्त करना कठिन होता है शुरुआत मे जब शुद्ध सेल्युलोज निकालने की कोई अच्छी विधि नही थी तब तक कागज सुती कपडो से बनाया जाता था इनसे कागज बनाना बहुत सरल और उच्च कोटी का प्राप्त होता था।


जितना अधिक शुद्ध सेल्युलोज होता कागज उतना स्वच्छ और सुंदर बनता है। रुई भी शुद्ध सेल्युलोज ही है लेकिन यह कपडा बनाने के उपयोग मे आती है क्योंकि यह मंहगी होती है और इसमे परस्पर जुटने का गुण नही होता है। कागज की रद्दी और कपडे के चिथडो मे भी सेल्युलोज ज्यादा मात्रा मे पाया जाता है इनसे भी कागज निर्माण किया जाता है। आज कल मुख्य रुप से कागज बनाने मे चिथडे, कागज की रद्दी, और बांस तथा स्प्रुस,चीड,घांसे जैसे सबई,एस्पार्टो का उपयोग किया जाता है। भारत मे बांस और सबई घांस का उपयोग ज्यादा किया जाता है।


कागज का अधिक उपयोग होना यह पर्यावरण के लिए बहुत ही गंभीर विषय है इसका उपयोग ज्यादा होने के कारण पर्यावरण पर बहुत बुरा प्रभाव पडा है। विश्व मे जितने भी पेड काटे जाते है उनमे से 35% कटे हुए पेडो का उपयोग कागज बनाने मे किए जाते है। भारत मे 2017-2018 की गणना के अनुसार 2017-2018 मे कुल 2.3 करोड टन कागज का उपयोग हुआ गणना के अनुसार 2019-2020 मे बढकर 2.5 करोड हो सकती है। कागज को सफेद के उपाय बहुत ही नुकसानदायक है जिससे पर्यावरण मे क्लोरिन और क्लोरिनेटेड डाईऑक्सिन छोडते है जो पर्यावरण के लिए बहुत खतरनाक है यह एक प्रकार का प्रधुशक है जिसके प्रयोग पर अंतर्राष्ट्रिय नियंत्रण है। यह गैस बहुत ही हानिकारक है इसका मानव जीवन पर खतरनाक प्रभाव है जैसे प्रजनन,विकास पर और बिमारी से प्रतिरक्षा, हर्मोन सम्बंधी सम्स्याए शामिल है। मानवो मे 80-90% डाईऑक्सिन भोजन द्वारा आता है यह कारखानो द्वारा पर्यावरण मे छोडा जाता है और यह जानवरो द्वारा मानवो तक पहुच जाता है यह( डाईऑक्सिन) पशुओ की चर्बि मे जमा हो जाते है अर्थात यह पशुओ के दुध,मांस और मछली द्वारा मनुष्य तक आता है जिससे गंभिर बिमारी का निर्माण होता है। इसलिए कागज का उपयोग संभाल कर करना चाहिए और कम करना चाहिए ताकि पर्यावरण को कम हानि होने से बचा सके।

गुरुवार, 13 जून 2019

क्या आप जानते है ? कौनसा राज्य कब बना ? जानिए हिंदी मे (IN HINDI)

index


अगर आप इस पोस्ट या वेबसाइट से जुडे अपडेट देखना चाहते है या इस वेबसाइट के नए पोस्ट देखना चाहते है
तो आप नीचे दिए गए वेबसाइट के बटन पर क्लिक करे







हमारे भारत देश का मानचित्र आज जिस प्रकार से दिखाई देता है यह आज़ादी के पहले वैसा नही था। आज़ादी के पहले भारत मे बहुत सारी रियासते थी उनमे से कुछ रियासते इस नये भारत मे शामिल नहीं होना चाहती थी बाद मे उन सभी को एकजुट होना पडा इसके बाद निर्माण हुआ हमारा पुर्ण भारत। आज हम आपको बताएंगे की आजादी बाद कौन-से राज्य कब भारत मे सम्मिलित हुए। नीचे सभी राज्यो की तालिका दी गई है जिनमे क्रमांक,तालिका और राज्य कब निर्माण हुआ उसकी जानकारी दी गई है।



क्रमांक

राज्य का नाम

अलग राज्य घोषित करने का दिन

1

बिहार

1 अप्रेल 1936

2

असम

15 अगस्त 1947

3

जम्मु और कश्मिर

26 अक्तुबर 1947

4

उत्तर प्रदेश

26 जनवरी 1950

5

तमिलनाडु

26 जनवरी 1950

6

आंध्र प्रदेश

1 अक्तुबर 1953

7

पुद्दुचेरी

1 नव्म्बर 1954

8

राजस्थान

1 नव्म्बर 1956

9

अंदमान और निकोबार

1 नव्म्बर 1956

10

लक्ष्यदीप

1 नव्म्बर 1956

11

पश्चिम बंगाल

1 नव्म्बर 1956

12

कर्नाट्क

1 नव्म्बर 1956

13

दिल्ली

1956

14

मध्य प्रदेश

1 नव्म्बर 1956

15

केरल

1 नव्म्बर 1956

16

उडिसा

1 अप्रेल 1956

17

गुजरात

1 मई 1960

18

महाराष्टृ

1 मई 1960

19

गोवा

30 मई 1961

20

दादर और नगर हवेली

11 अगस्त 1961

21

नागालैंड

1 दिसम्बर 1963

22

चंडीगड

1 नव्म्बर 1966

23

पंजाब

1 नव्म्बर 1966

24

हरयाणा

1 नव्म्बर 1966

25

हिमाचल प्रदेश

25 जनवरी 1971

26

मेघालय

20 जनवरी 1972

27

मणिपुर

21 जनवरी 1972

28

त्रिपुरा

21 जनवरी 1972

29

सिक्किम

16 मई 1975

30

अरुणाचल प्रदेश

20 फरवरी 1987

31

मिज़ोरम

20 फरवरी 1987

32

दमन और दिहू

23 मई 1987

33

उत्तराखंड

9 नव्म्बर 2000

34

झारखंड

15 नव्म्बर 2000

35

छत्तीसगढ

15 नव्म्बर 2000

36

तेलंगाना

2 जुन 2014

3

लद्दाख

31 अक्टुबर2019




दी गई तालिका मे बिहार यह राज्य आज़ादी के पहले निर्माण हुआ था और बाकी के राज्य आज़ादी के समय या उसके बाद निर्माण किए।

मंगलवार, 11 दिसंबर 2018

ये है भारत के शक्तिशाली सुपर कंप्यूटर्स जो दुनिया के 500 शक्तिशाली सुपरकंप्यूटर्स में गिने जाते है जानिए हिंदी मे (IN HINDI

Index


अगर आप इस पोस्ट या वेबसाइट से जुडे अपडेट देखना चाहते है या इस वेबसाइट के नए पोस्ट देखना चाहते है
तो आप नीचे दिए गए वेबसाइट के बटन पर क्लिक करे







नवम्बर की सुपरकंप्यूटर गणना के अनुसार भारत के चार(4) सुपरकंप्यूटर्स(SUPERCOMPUTERS) विश्व के सबसे सर्वोच्च पांचसौ(TOP 500) सुपरकंप्यूटर्स मे दर्ज है जिनकी तालिका(LIST,TABLE) नीचे दर्शायी गई है और तालिका के नीचे विस्तार से बताया गया है।




विश्व पद (WORLD RANK)-
पैंतालीसवां (45th)
नाम (NAME)-
प्रत्युष (PRATYUSH)
उपयोग किए जानेवाला स्थान (SITE)-
इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ ट्रॉपिकल मैट्रोलोजी (INDIAN INSTITUTE OF TROPICAL METROLOGY)
निर्माता (MANUFACTURER)-
क्रे इंकॉर्पोरेशन (CRAY INCORPORATION)
कोरस की संख्या (NUMBER OF CORES)-
1,19,232
प्रोसेसर (PROCESSOR)-
एक्सेओं ई5-2695वी4 18सी 2.1गीगाहर्ट्ज़ (XEON E5-2695v4 18C 2.1GHZ
आरमैक्स (Rmax)-
3763.94 टेराफ्लोपस (TERAflops)
आरपीक (Rpeak)-
4006.2 टेराफ्लोप्स (TERAflops)
एनमैक्स (Nmax)-
5935104
विद्युत् शक्ति (POWER)-
1353.23 किलोवॉट (KILOWATT)
ऑपरेटिंग प्रणाली (OPERATING SYSTEM)-
क्रे लिनक्स एनवायरनमेंट (CRAY LINUX ENVIRONMENT)
इंटरकनेक्ट (INTERCONNECT)
एरीज इंटरकनेक्ट (ARIES INTERCONNECT)

● प्रत्युष यह सुपरकंप्यूटर विश्व के पैंतालीसवे(45th) स्थान पर स्थापित है और यह भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान (इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मैट्रोलोजी,INDIAN INSTITUTE OF TROPICAL METROLOGY) द्वारा उपयोग किया जाता है जो की महाराष्ट्र के पुणे में स्थित है। इसे क्रे इंकॉर्पोरेशन द्वारा बनाया गया है। इसमें 1,19,232 कोर्स(core) लगे हुए है और एक्सेओं ई5-2695वी4 18सी 2.1गीगाहर्ट्ज़ (XEON E5-2695v4 18C 2.1GHZ का प्रोसेसर लगा हुआ है। अब बात करते है इसकी तेजी की तो इसका आरमॅक्स(Rmax) है 3763.94 टेराफ्लोप्स और इसका आरपीक(Rpeak) है 4006.2 टेराफ्लोप्स तथा एनमॅक्स(Nmax) 5935104 है। यह सुपरकंप्यूटर 1353.23 किलोवॉट की विद्युत् शक्ति(POWER) पर चलता है और इसकी ऑपरेटिंग प्रणाली क्रे लिनक्स एनवायरनमेंट है तथा यह एरीज इंटरकनेक्ट द्वारा इंटरकनेक्टेड है।




विश्व पद (WORLD RANK)-
तिहत्तरवां (73rd)
नाम (NAME)-
मिहिर (MIHIR)
उपयोग किए जानेवाला स्थान (SITE)-
नॅशनल सेंटर फॉर मीडियम रेंज वेदर फोरकास्टिंग(NATIONAL CENTRE FOR MEDIUM RANGE WEATHER FORECASTING)
निर्माता (MANUFACTURER)-
क्रे इंकॉर्पोरेशन (CRAY INCORPORATION)
कोरस की संख्या (NUMBER OF CORES)-
83,592
प्रोसेसर (PROCESSOR)-
एक्सेओं ई5-2695वी4 18सी 2.1गीगाहर्ट्ज़ (XEON E5-2695v4 18C 2.1GHZ
आरमैक्स (Rmax)-
2570.4 टेराफ्लोपस (TERAflops)
आरपीक (Rpeak)-
2808.68 टेराफ्लोप्स (TERAflops)
एनमैक्स (Nmax)-
3,349,440
विद्युत् शक्ति (POWER)-
954.73 किलोवॉट (KILOWATT)
ऑपरेटिंग प्रणाली (OPERATING SYSTEM)-
क्रे लिनक्स एनवायरनमेंट (CRAY LINUX ENVIRONMENT)
इंटरकनेक्ट (INTERCONNECT)
एरीज इंटरकनेक्ट (ARIES INTERCONNECT)

● तिहत्तरवां(73th) पद प्राप्त करनेवाला यह सुपरकंप्यूटर भारत का दूसरा सुपरकंप्यूटर है जिसने विश्व के सबसे सर्वोच्च 500 सुपरकंप्यूटर में स्थान प्राप्त किया है जिसका नाम मिहिर है। इसे भी क्रे इंकॉर्पोरेशन द्वारा निर्माण किया गया है और इसे नॅशनल सेंटर फॉर मीडियम रेंज वेदर फोरकास्टिंग(NATIONAL CENTER FOR MEDIUM RANGE WEATHER FORECASTING) मे उपयोग किया जाता है। इसमें कुल मिलाकर 83,592 कोर्स(cores) लगे हुए है। मिहिर में एक्सेओं ई5-2695वी4 18सी 2.1गीगाहर्ट्ज़ (XEON E5-2695v4 18C 2.1GHZ प्रोसेसर लगा हुआ है। इस सुपरकंप्यूटर का आरमॅक्स 2570.4 और आरपीक 2808.68 है तथा एनमॅक्स 3349440 तक है। इस सुपरकंप्यूटर पर उपयोग की जानेवाली विद्युत् शक्ति 954.73 है। मिहिर की ऑपरेटिंग प्रणाली क्रे लिनक्स एनवायरनमेंट है और यह एरीज इंटरकनेक्ट द्वारा इंटरकनेक्टेड है।



विश्व पद (WORLD RANK)-
तीनसौ सैंतीसवां (337th)
नाम (NAME)-
आईएनसी1 (InC1)
उपयोग किए जानेवाला स्थान (SITE)-
सॉफ्टवेयर कंपनी(SOFTWARE COMPANY)
निर्माता (MANUFACTURER)-
सॉफ्टवेयर कंपनी(SOFTWARE COMPANY)
कोरस की संख्या (NUMBER OF CORES)-
38,400
प्रोसेसर (PROCESSOR)-
एक्सेओं ई5-2673वी4 20सी 2.3गीगाहर्ट्ज़ (XEON E5-2673v4 20C 2.3GHZ)
आरमैक्स (Rmax)-
1123.15 टेराफ्लोपस (TERAflops)
आरपीक (Rpeak)-
1413.12 टेराफ्लोप्स (TERAflops)
एनमैक्स (Nmax)-
70,10,880
मेमोरी (MEMORY)-
491520जीबी (GB)
ऑपरेटिंग प्रणाली (OPERATING SYSTEM)-
लिनक्स (LINUX)
इंटरकनेक्ट (INTERCONNECT)
40जी इथरनेट (40G ETHERNET)

● आईएनसी1(Inc1) यह सुपरकंप्यूटर तीनसौ सैतीसवां(337th) पद प्राप्त करनेवाला यह सुपरकंप्यूटर लेनोवो(LENOVO) नामक एक सॉफ्टवेयर कंपनी द्वारा बनाया गया है और यही सॉफ्टवेयर कंपनी इसका उपयोग करती है। इसमें 38,400 कोर्स(cores) लगे हुए है और इसमें एक्सेओं ई5-2673वी4 20सी 2.3गीगाहर्ट्ज़ (XEON E5-2673v4 20C 2.3GHZ) प्रोसेसर लगे हुए है। इस सुपरकंप्यूटर का आरमॅक्स 1123.15 टेराफ्लोप्स है और आरपीक 1413.12 टेराफ्लोप्स है अथवा इसका एनमॅक्स 70,10,880 है। इस कंप्यूटर की स्टोरेज 4,91,520 जीबी(GB) है और यह लिनक्स ऑपरेटिंग प्रणाली पर काम करता है तथा यह 40जी ईथरनेट(40G ETHERNET) से इंटरकनेक्टेड है।




विश्व पद (WORLD RANK)-
चारसौअट्ठासीवा (488th)
नाम (NAME)-
एसईआरसी (SERC)
उपयोग किए जानेवाला स्थान (SITE)-
सुपरकंप्यूटर एजुकेशन एंड रिसर्च सेंटर,इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ साइंस(SUPERCOMPUTER EDUCATION AND REASEARCH CENTRE(SERC),INDIAN INSTITUTE OF SCIENCE)
निर्माता (MANUFACTURER)-
क्रे इंकॉर्पोरेशन (CRAY INCORPORATION)
कोरस की संख्या (NUMBER OF CORES)-
31,104
प्रोसेसर (PROCESSOR)-
एक्सेओं ई5-2680वी4 12सी 2.5गीगाहर्ट्ज़ (XEON E5-2680v4 12C 2.5GHZ
आरमैक्स (Rmax)-
901.506 टेराफ्लोपस (TERAflops)
आरपीक (Rpeak)-
1244.16 टेराफ्लोप्स (TERAflops)
एनमैक्स (Nmax)-
32,45,184
विद्युत् शक्ति (POWER)-
607.50 किलोवॉट (KILOWATT)
ऑपरेटिंग प्रणाली (OPERATING SYSTEM)-
क्रे लिनक्स एनवायरनमेंट (CRAY LINUX ENVIRONMENT)
इंटरकनेक्ट (INTERCONNECT)
एरीज इंटरकनेक्ट (ARIES INTERCONNECT)

● चारसौअट्ठासीवें(488th) स्थान पर स्थापित यह सुपरकंप्यूटर भारत का चौथा सुपरकंप्यूटर है और यह भी क्रे इंकॉर्पोरेशन द्वारा निर्माण किया गया है जिसका नाम एसईआरसी(SERC) है इसे कर्नाटक में स्थित बंगलुरु शहर के सुपरकंप्यूटर एजुकेशन एंड रिसर्च सेंटर(SUPERCOMPUTER EDUCATION AND RESEARCH CENTER) अर्थात इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस(INDIAN INSTITUTE OF SCIENCE) मे उपयोग किया जाता है। इसमें कुल मिलाकर 31,104 कोर्स(cores) है और इसमें एक्सेओं ई5-2680वी4 12सी 2.5गीगाहर्ट्ज़ (XEON E5-2680v4 12C 2.5GHZ प्रोसेसर लगा हुआ है। इस सुपरकंप्यूटर का आरमॅक्स(Rmax) 901.506 टेराफ्लोप्स है और आरपीक 1244.16 टेराफ्लोप्स है। यह 607.50 किलोवॉट की विद्युत् शक्ति पर संचालित है। इसकी भी ऑपरेटिंग प्रणाली क्रे लिनक्स एनवायरनमेंट है और यह एरीज इंटरकनेक्ट द्वारा इंटरकनेक्टेड है।

शनिवार, 1 दिसंबर 2018

जानते हो कार्बोहाइड्रेट्स क्या है नहीं तो जानिए हिंदी में (IN HINDI)

Index


अगर आप इस पोस्ट या वेबसाइट से जुडे अपडेट देखना चाहते है या इस वेबसाइट के नए पोस्ट देखना चाहते है
तो आप नीचे दिए गए वेबसाइट के बटन पर क्लिक करे







          कार्बोहाइड्रेट्स क्या है ?     



कार्बोहाइड्रेट्स(CARBOHYDRATES) हमारे शरीर के सबसे महत्वपूर्ण पोषक मे से एक है। महत्वपूर्ण पोषक तत्व के साथ-साथ ऊर्जा का भी बहुत अच्छा स्त्रोत है। हमारा पाचन तंत्र(DIGESTIVE SYSTEM) कार्बोहाइड्रेट्स को ग्लूकोस में परिवर्तित करता है जिसे हम ब्लड शुगर(BLOOD SUGAR) भी कहते है। शरीर इस ग्लूकोस को हमारे कोशिकाओ(CELLS),ऊतकों(TISSUES) और अंगो(ORGANS) को ऊर्जा देने के लिए उपयोग करता है। हमारा शरीर ज्यादा ग्लूकोस/शुगर को यकृत(LIVER) और मांसपेशियो(MUSCELS) में जमा कर देता है और जब इसकी आवश्यकता होती है तो इसका उपयोग करता है। कार्बोहाइड्रेट्स रासायनिक ढंग से तीन निष्पक्ष अणुओ(MOLECULE) जो कार्बन,हाइड्रोजन और ऑक्सीजन है। कार्बोहाइड्रेट्स के दो स्वरूप है एक है सरल(SIMPLE) रूप और दूसरा है जटिल(COMPLEX) रूप। सरल रूप शुगर(SUGAR) को कहते है और जटिल रूप स्टार्च(STARCH) तथा फाइबर(FIBER) को कहते है। एक कार्बोहाइड्रेट्स के अंदर चार कैलोरीज(CALORIES) होती है।

#ref-menu कार्बोहाइड्रेट्स की हानि :-



कार्बोहाइड्रेट्स को यदि कोई मनुष्य कम लेता है तो ज्यादा हानि नही होती जितना इसे ज्यादा लेने से होती है। कार्बोहाइड्रेट्स को ज्यादा लेने से मोटापा(OBESITY) होने का खतरा बहुत बढ़ जाता है। जिससे हदयघात(HEART ATTACK) का खतरा भी होता है। कार्बोहाइड्रेट्स की बढ़ोतरी से शरीर में शुगर की मात्रा बढ़ने का भी खतरा होता है जिससे डाइबिटीज़(DIABETIS) होती है। कांस्टिपेशन(CONSTIPATION) यानि पाचन तंत्र खराब होने की संभवना होती है जिससे पूरा शारीरिक विकास कमजोर हो जाता है।

कार्बोहाइड्रेट्स के लाभ :-



कार्बोहाइड्रेट्स के कई लाभ है यदि इसे उचित मात्रा में लिया जाए। यह शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है जैसे की पाचन तंत्र कार्बोहाइड्रेट्स को ग्लूकोस में परिवर्तित करता है जिससे शरीर को ऊर्जा मिलती है और यह तुरंत ऊर्जा प्रदान करता है और जटिल कार्बोहाइड्रेट्स शरीर को लंबे समय तक ऊर्जा देता है क्योंकि यह शरीर मे धीरे-धीरे शुगर को प्रवाहित करता है। हमारे मस्तिष्क को 20% ऊर्जा की जरुरत होती है जो  शरीर का सबसे ज्यादा ऊर्जा खर्च करता है कार्बोहाइड्रेट्स इसे भी नियंत्रित रखता है। जटिल कार्बोहाइड्रेट्स में कम कोलेस्ट्रोल(CHOLESTROL) होता है जिससे डाइबिटीज़ का खतरा कम रहता है। यह पाचन तंत्र को और सुधारने का भी काम करता है। जटिल कार्बोहाइड्रेट्स से वजन नियंत्रित रखने में सहायता होती है।

कार्बोहाइड्रेट्स के स्त्रोत :-




कार्बोहाइड्रेट्स सबसे ज्यादा आलू ,ब्राउन राइस, केले और सब्जियों में पाया जाता है और गेहु में भी सबसे ज्यादा पाया जाता है। कार्बोहाइड्रेट्स का सेवन हमें हमारे दैनिक आहार में 60% तक करना चाहिए।

रविवार, 25 नवंबर 2018

क्या होता है Rmax और Rpeak जानिए हिंदी मे (IN HINDI)



अगर आप इस पोस्ट या वेबसाइट से जुडे अपडेट देखना चाहते है या इस वेबसाइट के नए पोस्ट देखना चाहते है
तो आप नीचे दिए गए वेबसाइट के बटन पर क्लिक करे







क्या होता है आरमैक्स(Rmax) और आरपीक(Rpeak) ?

1. आरमैक्स(Rmax) और आरपीक(Rpeak) यह लिनपैक बेंचमार्क(LINPACK BENCHMARK) द्वारा उच्च प्रदर्शन संगणना(HIGH PERFORMANCE COMPUTING)  के लिए निर्धारित किया जाता है।

2. यह सुपरकंप्यूटर का पद(RANK) निर्धारित करने के लिए उपयोग किया जाता है।

3. आरमैक्स(Rmax) यह एक प्रणाली(SYSTEM) के सबसे अधिकतम(MAXIMUM) किए गए प्रदर्शन(PERFORMANCE) का स्तर(LEVEL) को दर्शाता है। उदाहरण के लिए जैसे की 100 मीटर दौड़ स्पर्धा किसी व्यक्ति ने 20 सेकंड में पूर्ण कर ली वह प्रत्येक दौड़ स्पर्धा 20 सेकंड के अंदर पूर्ण कर रहा है वह 20 सेकंड उसका आरमैक्स(Rmax) है इतने समय के अंदर वह दौड़ स्पर्धा पूर्ण करके दौड़ स्पर्धा 20 सेकंड में जीत जाता है या 20 सेकंड सबसे अधिकतम समय है ।

4. आरपीक(Rpeak) यह उस प्रणाली(SYSTEM) का सैद्धांतिक(THEORETICAL,अनुमानित)  स्तर को दर्शाता है। उदाहरण के लिए वही उदाहरण लेते है दौड़ स्पर्धा का अब वही व्यक्ति वही दौड़ स्पर्धा उस व्यक्ति ने 18 सेकंड में पूर्ण की यह उसका न्यूनतम समय है या वह वयक्ति इससे भी कम समय में यह तय करता है तो वह समय उसका आरपीक(Rpeak) है।

5. आरमैक्स(Rmax) और आरपीक(Rpeak) इन्हें टेराफ्लोप्स(Teraflops) अथवा पेटाफ्लोप्स(Petaflops) में मापा जाता है। यह बहुत बड़ी संख्या है।


Most Viewed Post